“”सुनो”” : By Vandana Raj

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सुनो

सुनो तुम्हारे लिए वृहद खुला आसमान बचा के रखा है
तुम्हारे बढ़ते क़दमों के लिए मोड़ सजा के रखा है
सुनो तुम्हारी उड़ान को पँख नहीं,हौसलों की जरुरत होगी
प्रगति से उन्नति के मोड़ तक जाने को ज्ञान रचा रखा है
सुनो संघर्ष है,थकना नहीं,तुम रुकना नहीं,रोकेंगे लोग कई,
कुछ ने स्त्रियों को आज भी बंधुआ मजदूर बना रखा है
सुनो तुम किसी की तिजोरी का खज़ाना नहीं अब
तुम स्वयं सृजनी हो जिसने अचेतन में प्राण रखा है
सुनो तुम अमूल्य हो तुम अपनी प्रहरी खुद रहना
तुम खुद एक तिजोरी हो जिसने सबको संभाल रखा है
सुनो तुम निश्चिन्त हो विश्वास से पथ पे आगे बढ़ना
दुनिया में अब नयी पीढ़ी ने जिम्मा संभाल रखा है

वंदना राज

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