स्वच्छता पखवाड़े के तहत
अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला एवं संवाद सम्पन्न

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स्वच्छता पखवाड़े के तहत
अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला एवं संवाद सम्पन्न
बीकानेर 21 जुलाई, 2022 भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित एवं बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर द्वारा संचालित जन शिक्षण संस्थान, बीकानेर में चल रहे स्वच्छता पखवाड़े के तहत आज स्थानीय कौशल केन्द्र पर अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बोलते हुए संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी महेश उपाध्याय ने कहा कि कई वस्तुएं ऐसी है जिन्हें हम एक बार उपयोग लेने के बाद फेंक देते है और वो हमारे पर्यावरण को नूकसान भी पहुंचाती है। ऐसे में अगर उन बेकार चीजों से कुछ नया बनाकर दुबारा उपयोग लायक बना लेते है तो ये अपशिष्ट प्रबंधन कहलाता है। श्री उपाध्याय ने कहा कि हमारे दैनिक उपयोग मंे आने वाली ऐसी बहुत-सी वस्तुएं है जो जिन्हें हम बिना फेंके फिर से उपयोग लायक बना सकते है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वुमन पावर सोसाइटी ग्रुप की प्रदेशाध्यक्ष अर्चना सक्सेना ने कहा कि महिलाएं ही स्वच्छता के प्रति सबसे अधिक जागरूक रहती है। इसीलिए महिलाओं का यह दायित्व बन जाता है कि वो स्वच्छता का पाठ पूरे समाज को भी पढ़ाएं और देश में स्वच्छता के प्रति जागरूकता की एक लहर चला दें।
कार्यक्रम का संयोजन करते हुए कार्यक्रम सहायक तलत रियाज़ ने बताया कि स्वच्छता पखवाड़ा के तहत अलग-अलग विषयों पर आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। कबाड़ से जुगाड़ करके हम घर में बिना काम की चीजों को काम की बना सकते है।
संदर्भ व्यक्ति रेशमा वर्मा ने वेस्ट मेटीरियल का कैसे उपयोग करें इस पर व्याख्यान सहित प्रायोगिक कार्य करके बताया कि किस प्रकार घर पर पड़ी बेकार की वस्तुओं को उपयोगी बनाया जा सकता है। श्रीमती वर्मा ने घर में पड़े खाली प्लास्टिक, कागज आदि के डिब्बे, कलर, रंग, अखबार, कांच एवं प्लास्टिक की खाली बोतले, दीपक, पोट आदि का प्रयोग करते हुए उपयोगी आइटम बनाकर अपनी प्रस्तुति दी।
आर्युवेद विषय पर व्याख्यान देते हुए रमेश उपाध्याय और आपके सहयोगी पप्पू ने बताया कि वर्तमान समय में हवा एवं पानी के दूषित होने के बाद अधिकतर लोग बीमार रहते है। अगर हम योग एवं आर्युवेद के दवाइयों का उपयोग करें तो हम स्वच्छता के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रख सकते है।
इस कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए बेकार की वस्तुओं को उपयोगी वस्तओं में बदल लिया।

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