हिन्दी पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है- डाॅ. केवलिया

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare
[metaslider id=”83227″]

बीकानेर, 11 सितम्बर। वरिष्ठ साहित्यकार-शिक्षाविद् डॉ. मदन केवलिया ने कहा कि हिन्दी पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधती है। देवनागरी लिपि को सर्वश्रेष्ठ लिपि माना गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए शुद्ध भाषा लिखनी आवश्यक है।
डॉ. केवलिया बुधवार को राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय सभागार में हिन्दी दिवस के तहत आयोजित ‘प्रतियोगी परीक्षाएँ और सामान्य हिन्दी’ विषयक संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हिन्दी सरल, सहज और संस्कारी भाषा है। हिन्दी माध्यम से पढ़े विद्यार्थी देश की प्रमुख परीक्षाओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर रहे हैं। हिन्दी भाषा का शुद्ध उच्चारण भी जरूरी है। हिन्दी आज पूरे देश की सम्पर्क भाषा बन गई है। हिन्दी राष्ट्रभाषा बने, इसके लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्य हिन्दी प्रश्न पत्र में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए उत्कृष्ट पुस्तकों का अध्ययन करना चाहिए व इस दिशा में पुस्तकालय का काफी महत्त्व है।
कथाकार शरद केवलिया ने कहा कि किसी भी देश की एकता, अखंडता व सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा में उस देश की भाषा का विशेष योगदान रहता है व यह कार्य हिन्दी के माध्यम से हो रहा है। पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा ने कार्यक्रम की महत्ता बताई और डाॅ. केवलिया का परिचय दिया। कवि अब्दुल शकूर सिसोदिया ने आभार व्यक्त किया।

इस दौरान रश्मि लाटा, रामस्वरूप विश्नोई, इंद्र ओझा, सत्यनारायण सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, आमजन उपस्थित थे।

Categories:
error: Content is protected !!