साहित्य अकादेमी को अत्यंत दुख और आघात के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि प्रख्यात उपन्यासकार, दार्शनिक, पटकथा लेखक, बहुमुखी विद्वान और साहित्य अकादेमी के महत्तर सदस्य डॉ. एस. एल. भैरप्पा का निधन हो गया है। उनके अधिकांश प्रमुख उपन्यास (जैसे वंशवृक्ष, तत्त्वालोके निनादे मगने, पर्व, और सार्थ) प्राचीन भारतीय दार्शनिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं और उन्होंने प्राचीन ग्रंथों, परंपराओं और ऐतिहासिक कथाओं के प्रति जनमानस में गहन रुचि को पुनः सृजित किया। उन्होंने अकेले ही भारत में उपन्यास लेखन में क्रांति ला दी और उनकी कृतियाँ, जो भारत की विविध दार्शनिक विचारधाराओं पर आधारित थीं, विशेष रूप से युवा वर्ग में अत्यधिक लोकप्रिय हुईं, जिसके परिणामस्वरूप कई युवाओं ने दर्शनशास्त्र को गंभीरता से अपनाया। उनका निधन भारतीय साहित्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है। साहित्य अकादेमी इस सौम्य प्रतिभा के निधन पर शोक व्यक्त करती है और भारतीय साहित्यिक समुदाय के साथ मिलकर डॉ. एस.एल. भैरप्पा को श्रद्धांजलि अर्पित करती है।










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