जीवाश्म: बीते युग की कहानी पर संवाद..

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare



Bikaner अजित फाउण्डेशन द्वारा आयोजित मासिक संवाद के अन्तर्गत आज जीव विज्ञानी प्रो. (डॉ.) राकेश हर्ष ने ‘‘जीवाश्म: बीते युग की कहानी’’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जीवाश्म हमें ढूंढने एवं खोदने से मिलते है। जीवाश्मों से हम उस काल के पादप एवं जन्तुओं में जो परिवर्तन हुआ उसके बारे में शोध कर सकते है। जीवाश्मों से ही हम चट्टानों की आयु का पता कर सकते है। अधिकतर जीवाश्म पादप एवं जन्तुओं के सख्त हिस्से के होते है क्योंकि नरम हिस्सा गल या नष्ट हो जाता है। ग्लेश्यिरों में हमें पूर्ण जन्तुओं के जीवाश्म भी मिल सकते है। मुख्य रूप से करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी की हलचल के कारण पादप या जीव-जन्तु जो धूल एवं मिट्टी के नीचे दब गये और उन पर पानी या हवा का असर ज्यादा न हुआ वह जीवाश्मों में तब्दील हो गये।
डॉ. राकेश हर्ष ने बताया कि उन्होंने बीकानेर से भी हजारों जीवाश्मों को एकत्रित किया उनमें से 32 नई प्रजातियों के जीवाश्म उन्होंने ढूंढे। जीवाश्म के आकारों की जब बात करते है तो उन्होंने बताया कि जीवाश्म जीव के शरीर, जीव का एहसास दिलाने वाले या उनके पद्चिन्हों के ट्रेसिंग के द्वारा भी पाए जाते है। उन्होंने बताया कि कई जीवाश्म इतने सूक्ष्म होते है कि उनको मोइक्रोस्कॉप से देखना पड़ता है। साथ ही कुछ जीवश्म ऐसे भी होते है जो पूरे विश्व में लगभग कई स्थानों में मिले है। जीवाश्मों पर शोध करते समय हमें कई बार केवल उनके इम्प्रेशन मिलते है जिससे हम उनके बाह्य संरचना का पता लगा सकते है। संवाद के दौरान डॉ. हर्ष ने जुरासिक काल से लेकर टरसरी काल तक के जीवाश्मों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कहा कि अजित फाउण्डेशन द्वारा विभिन्न विषयों पर ऐसी वार्ताएं आयोजित होती रहती है लेकिन यह ऐतिहासिक संवाद है जिसमें हम करोड़ो वर्ष पूर्व के जीवाश्मों को छू सकते है तथा अपनी आंखों से देख सकते है।
कार्यक्रम के अंत में शिक्षाविद् राजेन्द्र जोशी ने धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यो में जनसहभागिता होनी जरूरी है, जिससे यह ऐतिहासिक जानकारी भावी पीढ़ि तक पहुंच पाएगी।
कार्यक्रम में डॉ. अजय जोशी, डॉ. रितेश व्यास, योगेन्द्र पुरोहित, षिव कुमार वर्मा, आनन्द पुरोहित, मोहम्मद फारूक, महेष उपाध्याय, जुगल किशोर पुरोहित, प्रेम नारायण व्यास, निखिल स्वामी, नरेश मारू, रामगोपाल व्यास, विनय थानवी, प्रशान्त बिस्सा, खूषबू, प्रियांशु हर्ष सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Categories:
error: Content is protected !!