ज्ञान भारतम् मिशन से प्राचीन राजस्थानी पांडुलिपियों को मिलेगी डिजिटल पहचान

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बीकानेर। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत प्राचीन साहित्यिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राजकीय संग्रहालय परिसर स्थित सादूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर एवं विश्वगुरूदीप आश्रम शोध संस्थान, जयपुर के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस एमओयू के तहत संस्थान में संग्रहित दुर्लभ एवं अमूल्य हस्तलिखित राजस्थानी पांडुलिपियों का निःशुल्क डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा वैज्ञानिक सूचीकरण किया जाएगा। इससे न केवल राजस्थानी साहित्य और ज्ञान परंपरा को संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि इसे डिजिटल माध्यम से वैश्विक पहचान भी मिलेगी।
समझौता ज्ञापन पर ज्ञान भारतम् मिशन के क्लस्टर निदेशक महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी एवं संस्थान सचिव राजेन्द्र जोशी ने हस्ताक्षर किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं नागरिक अभिनंदन के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वामी ज्ञानेश्वर पुरी ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन भारतीय सांस्कृतिक जड़ों को सशक्त करने का एक राष्ट्रीय अभियान है, जिसके माध्यम से प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप में पहुंचाया जा रहा है।
कार्यक्रम में ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि सर्वेक्षण अधिकारी मोहित बिस्सा की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने क्षेत्र में किए गए पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्यों की जानकारी देते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर लव कुमार देराश्री, लक्ष्मीकांत उपाध्याय सहित साहित्य, शिक्षा एवं संस्कृति जगत से जुड़े अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यह पहल बीकानेर सहित पूरे राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल युग से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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