
बीकानेर, 17 फरवरी 2026 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा आज श्रीडूंगरगढ़ (बीकानेर) के ग्राम शीतलनगर, में ‘अनुसूचित जाति उप-योजना’ (एस.सी.एस.पी.) के तहत एक दिवसीय पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, शीतलनगर में आयोजित किया गया। शिविर में 96 से अधिक महिला व पुरुष पशुपालकों को लाभान्वित किया गया। साथ ही 72 स्कूली विद्यार्थियों में उष्ट्र प्रजाति के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु ‘जलवायु परिवर्तन के दौर में ऊँट की भूमिका’ विषयक परिचर्चा भी आयोजित की गई।
शिविर में विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने पशुओं में प्रमुख रोगों की पहचान, बचाव एवं उपचार संबंधी औषधियों की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने समय पर टीकाकरण, नियमित कृमिनाशक एवं वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने पर बल देते हुए कहा कि इससे पशुधन को रोगमुक्त रखकर उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशीनाथ ने अधिक एवं स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तथा पशुओं की संतुलित शारीरिक वृद्धि हेतु पर्याप्त आहार, उचित देखभाल और नियमित स्वास्थ्य प्रबंधन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन उपायों को अपनाकर पशुपालक उत्पादन एवं आय दोनों बढ़ा सकते हैं।
केंद्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने अपनी बात वैज्ञानिकों के माध्यम से पहुंचाते हुए कहा कि भारत सरकार की ‘अनुसूचित जाति उप-योजना’ के माध्यम से पशुपालकों को सशक्त बनाने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एनआरसीसी ऊँटनी के दूध के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयत्नशील है। उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया कि वे केंद्र की विकसित तकनीकों का लाभ उठाकर ऊँट दुग्ध आधारित उद्यमिता से जुड़ें, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति में ठोस सुधार सुनिश्चित हो सके।
एस.सी.एस.पी. उप-योजना के नोडल अधिकारी श्री मनजीत सिंह ने बताया कि पशुपालकों को पशु आहार, खनिज मिश्रण, लवण, कृमिनाशक दवाइयां, प्राथमिक उपचार किट आदि तथा स्कूली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप स्कूली किट का वितरण किया गया। केंद्र के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल ने इस उप-योजना के उद्देश्यों, उसके महत्त्व एवं एन.आर.सी.सी. की विभिन्न प्रसार गतिविधियों पर प्रकाश डाला तथा वित्त एवं लेखा अधिकारी श्री आशीष पित्ती ने एस.सी.एस.पी. के अंतर्गत पशुपालकों के लिए निर्धारित प्रावधानों, अनुदान एवं सहायता प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी।
पशुपालकों ने बताया कि शिविर एवं संवाद कार्यक्रम से उनकी आय और आजीविका सुदृढ़ करने में सहायता मिल सकेगी। वहीं विद्यालय स्टाफ ने स्कूली विद्यार्थियों हेतु आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिल सकेगा।













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