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पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों से पशुपालन करना चाहिए: प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समर कुमार घोरुई एनआरसीसी

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एनआरसीसी बीकानेर द्वारा सांवता, जैसलमेर में पशु स्वास्थ्य शिविर व संवाद कार्यक्रम


बीकानेर, 22 जुलाई 2025 । भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एन.आर.सी.सी.), बीकानेर द्वारा अनुसूचित जाति उप योजना (एस.सी.एस.पी.) के अंतर्गत जैसलमेर जिले के सांवता गांव में आज दिनांक को पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें गांव सांवता व आस-पास क्षेत्र के 107 पशुपालकों ने अपने पशुओं यथा – ऊँट (425), गायों (89) एवं भेड़-बकरियों (590) सहित कुल 1104 पशुओं सहित अपनी सहभागिता निभाई। इस दौरान पशुपालकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं, दवाएं एवं पशु आहार सामग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
पशुपालकों से संवाद के दौरान एनआरसीसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समर कुमार घोरुई ने कहा कि पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धतियों से पशुपालन करना चाहिए। उन्‍होंने पशुपालन व्‍यवसाय में संतुलित आहार, खनिज मिश्रण एवं केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाने की बात कही ताकि वे अपने पशुधन से अधिक उत्पादन व लाभ प्राप्त कर सकें। एन.आर.सी.सी. के वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने कहा कि बदलती जलवायु के कारण पशुपालकों को प्रजनन, पोषण, टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना जरूरी है, उचित देखभाल से रोगों से बचाव संभव है। उन्‍होंने बताया कि फील्‍ड क्षेत्र से सर्रा और खुजली की जांच के लिए रक्त व त्वचा के नमूने लिए गए। केन्‍द्र के पशु चिकित्‍सा अधिकारी डॉ. काशी नाथ ने जानकारी दी कि शिविर में लाए गए पशुओं में चीचड़, पेट के कीड़े, भूख में कमी जैसे लक्षण थे, जिनका शिविर स्‍थल पर ही उपचार किया गया। साथ ही रोगों से बचाव हेतु पशुओं में टीकाकरण भी किया गया।
एन.आर.सी.सी. के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिक टीम से निरंतर संपर्क बनाए रखते हुए कार्यक्रम की प्रगति की जानकारी ली और इसे प्रभावी ढंग से संपन्न करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। टीम के माध्‍यम से उन्‍होंने पशुपालकों तक अपनी बात पहुंचाते हुए कहा कि मरु क्षेत्र की समृद्धि ऊँट संरक्षण और वैज्ञानिक पशुपालन पर आधारित है। पशुपालकों को पारंपरिक ज्ञान के साथ नवाचार अपनाकर ऊँट पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करना चाहिए।
इस अवसर पर जैसलमेर सांवता के प्रगतिशील पशुपालक श्री सुमेर सिंह, अध्यक्ष, देगराय संरक्षण समिति, जैसलमेर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के प्रति आभार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि ऊँट हमारे मरुस्थलीय जीवन की रीढ़ है। ऐसे वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पशुपालकों को नई दिशा और समाधान प्रदान करते हैं।
केन्द्र की अनुसूचित जाति उप-योजना (एस.सी.एस.पी.) के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री अखिल ठुकराल, वित्त एवं लेखा अधिकारी श्री आशीष पिती, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी श्री मनजीत सिंह तथा श्री अमित कुमार का विशेष योगदान रहा, जिनके समन्वित सहयोग से कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सका।

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