GENERAL NEWS

साहित्य अकादेमी द्वारा श्रीलाल शुक्ल जन्मशताब्दी का आयोजन

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare

रागदरबारी का संपूर्ण रचनाबंध व्यंग्य का है – नित्यानंद तिवारी

नई दिल्ली। 28 अगस्त 2025; साहित्य अकादेमी द्वारा आज प्रख्यात हिंदी कथाकार श्रीलाल शुक्ल की जन्मशती पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के आरंभ में साहित्य अकादेमी द्वारा निर्मित तथा शरद दत्त द्वारा निर्देशित श्रीलाल शुक्ल पर केंद्रित वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अकादेमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने कहा कि जब सामाजिक विद्रूपता को उसकी पराकाष्ठा में व्यक्त करना होता है तो उसके लिए व्यंग्य या फैंटेसी ही उपयुक्त माध्यम होती है, श्रीलाल शुक्ल ने भी यही किया, उन्होंने व्यंग्य शैली को अपनाया। उनके उपन्यास अपने समय से आगे की रचनाएँ हैं, जिन्हें वैश्विक धरातल पर देखने की जरूरत है। आरंभ में स्वागत वक्तव्य देते हुए साहित्य अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल का साहित्य हमें समाज की वास्तविकता से परिचित कराता है और व्यंग्य के माध्यम से सुधार की प्रेरणा देता है। अपने आरंभिक वक्तव्य में गोविंद मिश्र ने श्रीलाल शुक्ल से जुड़े कुछ संस्मरण सुनाते हुए उन्हें मस्ती और अल्हड़ता से भरपूर व्यक्ति बताया तथा कहा कि वे मूलतः उपन्यासकार थे, जिनकी औपन्यासिक दृष्टि बहुत विषद थी।
अपने बीज वक्तव्य में रामेश्वर राय ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल के लेखन की गहराई को नापने के लिए आलोचना के तथाकथित औजार नाकाफ़ी हैं। उनके लिखे उपन्यासों से हम आजादी के बाद के हिंदुस्तान की भयावह स्थिति को जान-समझ सकते हैं। उनके उपन्यास आजादी के सपनों के टूटने के उपन्यास हैं, शहीदों से क्षमा प्रार्थना हैं, इतिहास की मार्मिक आत्म स्वीकृतियाँ हैं। श्रीलाल शुक्ल की कनिष्ठ सुपुत्री विनीता माथुर ने अपने पिता के कई संस्मरण साझा करते हुए उनकी शास्त्रीय संगीत और शस्त्रों के प्रति रुचि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने उनकी खेल आदि अन्य रुचियों के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे पूरे परिवार ने पापाजी से विनम्रता, सरलता और उदारता के गुण पाए हैं। अपने समाहार वक्तव्य में साहित्य अकादेमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा ने कहा कि श्री शुक्ल ने व्यंग्य को एक अस्त्र की तरह इस्तेमाल किया और साठ के दशक के बाद के भारत की राजनीतिक और समाज शास्त्रीय स्थितियों को सबके सामने रखा।
श्रीलाल शुक्ल के व्यक्तित्व पर केंद्रित सत्र की अध्यक्षता करते हुए ममता कालिया ने कहा कि श्रीलाल शुक्ल बहुत अच्छे मनुष्य और लेखक थे। उनकी बातंे मजेदार और चुटीली होती थीं। शैलेंद्र सागर ने उनसे अपनी पहली मुलाकात और मृत्युपर्यंत संबंधों को याद करते हुए कहा कि वे दूसरों पर अपने विचार थोपते नहीं थे, सबके विचारों का सम्मान करते थे। अखिलेश ने श्रीलाल जी को युवा ऊर्जा से संपन्न व्यक्ति के रूप में याद किया और कहा कि वे नए से नए रचनाकारों को पढ़ते थे और उन्हें अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराते थे।
श्रीलाल शुक्ल के उपन्यासों पर केंद्रित सत्र की अध्यक्षता करते हुए नित्यानंद तिवारी ने कहा कि ‘रागदरबारी’ का संपूर्ण रचनाबंध व्यंग्य का है, उसकी भूमि व्यंग्य की है। जब हम इसे व्यंग्य उपन्यास कहते हैं तो यहाँ व्यंग्य विशेषण नहीं है, व्यंग्य और उपन्यास दोनों ही संज्ञाएँ हैं। विनोद तिवारी ने ‘रागदरबारी’ को औपन्यासिक ढाँचे को तोड़ने वाला उपन्यास बताते हुए कहा कि यह यूटोपिया नहीं डिस्टोपिया का उपन्यास है। प्रेम जनमेजय ने उनके ‘विश्रामपुर का संत’, ‘मकान’, ‘आदमी का जहर’ आदि उपन्यासों पर अपने विचार व्यक्त किए।
श्रीलाल शुक्ल के उपन्यासेतर साहित्य पर केंद्रित सत्र की अध्यक्षता करते हुए रेखा अवस्थी ने कहा कि शुक्ल जी की कहानियाँ अतिविशिष्ट हैं, जिनमें चिह्नित प्रवृत्तियों को परवर्ती कथाकारों ने आगे बढ़ाया। उनका मानना था कि व्यंग्य एक शैली है, विधा नहीं। सुभाष चंदर ने श्रीलाल शुक्ल को हिंदी के पाँच श्रेष्ठ व्यंग्यकारों में शुमार करते हुए उनकी अनेक कहानियों उद्धृत किया। राजकुमार गौतम ने श्रीलाल शुक्ल द्वारा लिखित विनिबंधों, कहानियों, रेडियो लेखन, साक्षात्कार आदि पर अपने विचार साझा किए। संगोष्ठी का संचालन अकादेमी के उपसचिव देवेंद्र कुमार देवेश ने किया। कार्यक्रम में शुक्ल जी के परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में लेखक, साहित्य प्रेमी, विद्यार्थी उपस्थित थे।

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare

About the author

THE INTERNAL NEWS

Add Comment

Click here to post a comment

error: Content is protected !!