एमजीएसयू में “स्वस्थ मन, प्राकृतिक जीवन” विषयक दो दिवसीय योग कार्यशाला का शुभारंभ…

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बीकानेर, 18 सितम्बर 2025।
महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के योग विभाग द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला “स्वस्थ मन, प्राकृतिक जीवन” का शुभारंभ आज विश्वविद्यालय सभागार में हुआ। कार्यक्रम का संचालन योग विभाग की अतिथि संकाय सुश्री सपना बेरवाल ने किया।

भारतीय परंपरा के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं माता सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के परिक्षा नियंत्रक डॉ राजा राम चुयल , मुख्य अतिथि डॉ. कन्हैया लाल कच्छावा (मनोचिकित्सक एवं नशा मुक्ति विशेषज्ञ), समन्वयक डॉ. धर्मेश हरवानी, विभाग प्रभारी डॉ. सीमा शर्मा, तथा अतिथि संकाय डॉ. हितेंद्र मारू, सुश्री प्रियंका रघुवंशी और सुश्री यशोवर्धिनी पुरोहित मंचासीन रहे।
डॉ राजाराम चोयल ने “स्ट्रेस मैनेजमेंट” की थ्योरी को ध्यान में रखते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखकर ही इस आधुनिक युग में आगे बढ़ पायेंगे।

मुख्य अतिथि डॉ. कन्हैया लाल कच्छावा ने “मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोदैहिक बीमारियों के प्रबंधन” विषय पर कहा—
“मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है। योग, ध्यान और प्राकृतिक जीवनशैली से इसे संतुलित कर स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ा जा सकता है।”

योग विभाग प्रभारी डॉ. सीमा शर्मा ने कहा—
“योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का साधन है। इस कार्यशाला से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य और प्राकृतिक जीवनशैली का गहरा बोध होगा।”

समन्वयक डॉ. धर्मेश हरवानी ने अपने विचार रखते हुए कहा—
“ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में जागरूकता और आत्मबल बढ़ाने का कार्य करते हैं। योग और प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन में अपनाना आज की आवश्यकता है।”

अतिथि व्याख्याता डॉ. हितेंद्र मारू ने कहा—
“मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक समरसता भी योग से ही संभव है। योग हमें तनावमुक्त कर सकारात्मकता की ओर ले जाता है।”

अतिथि व्याख्याता सुश्री प्रियंका रघुवंशी ने अपने संबोधन में कहा—
“ध्यान (Meditation) मन की शांति और आत्मबल का सबसे सशक्त साधन है। विद्यार्थी जीवन में ध्यान को अपनाना उनके संपूर्ण विकास के लिए अत्यंत लाभकारी होगा।”
अतिथि व्याख्याता
अतिथि व्याख्याता सुश्री यशोवर्धिनी पुरोहित ने कहा—
“प्राकृतिक जीवनशैली हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है। योग और प्राकृतिक चिकित्सा का मेल एक स्वस्थ एवं खुशहाल समाज की नींव रख सकता है।”

कार्यशाला के पहले दिन मानसिक स्वास्थ्य, मनोदैहिक बीमारियों का प्रबंधन, प्राकृतिक चिकित्सा, ध्यान और योग द्वारा जीवनशैली सुधार जैसे विषयों पर व्याख्यान हुए।

कार्यशाला का सफल संचालन सुश्री सपना बेरवाल ने किया। दूसरा दिन (19 सितम्बर) को प्राकृतिक चिकित्सा, ध्यान और योगाभ्यास पर विशेष सत्र आयोजित होंगे।

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