
गर्मी की छुट्टियाँ बच्चों के लिए केवल आराम का समय नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें निखारने का सुनहरा अवसर होती हैं। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली और पढ़ाई के बढ़ते दबाव के कारण बच्चों को वर्षभर अपने शौक और कौशल विकसित करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में ग्रीष्मकालीन अवकाश उनके सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।एक खिलाड़ी एवं कोच के रूप में मेरा मानना है कि बच्चों को इन छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जुड़ना चाहिए। खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं, बल्कि अनुशासन, टीमवर्क, आत्मविश्वास और नेतृत्व जैसे गुणों का भी विकास करते हैं।बच्चों को चाहिए कि वे अपने परिवार के साथ समय बिताते हुए नई-नई गतिविधियों में भाग लें जैसे कि आउटडोर स्पोर्ट्स, योग, तैराकी, कला, संगीत या किसी नए कौशल को सीखना। इससे उनका मानसिक और शारीरिक संतुलन बेहतर होगा औरअधिक ऊर्जावान एवं सकारात्मक बनेंगे।अभिभावकों की भी जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखते हुए उन्हें खेल और रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करें। सही मार्गदर्शन और सहयोग से बच्चे अपने अंदर छिपी क्षमताओं को पहचान सकते हैं और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।इस ग्रीष्मकालीन अवकाश को केवल समय बिताने का माध्यम न समझें, बल्कि इसे एक अवसर के रूप में लें ,सीखने, बढ़ने और खुद को बेहतर बनाने का।निशा लिम्बा बास्केटबॉल खिलाड़ी एव कोच सचिव जिला नेटबॉल संघ, बीकानेर






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