विश्व दुग्ध दिवस पर एनआरसीसी में गैर-गोवंशीय दुग्ध की संभावनाओं पर कार्यशाला आयोजित

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बीकानेर 01 जून 2026 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र (एन.आर.सी.सी.) द्वारा विश्‍व दुग्‍ध दिवस के उपलक्ष्‍य पर आज आयोजित कार्यशाला में वचुर्अल रूप से जुड़ते हुए मुख्य अतिथि वक्ता डॉ. आशीष कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक (अकादमिक), भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल ने “परंपरा से नवाचार तक : आधुनिक विश्व में गैर-गोवंशीय दुग्ध” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक डेयरी क्षेत्र का नेतृत्व कर रहा है तथा बकरी एवं ऊँट जैसे गैर-गोवंशीय पशुओं का दूध पोषण, स्वास्थ्य एवं ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि ऊँटनी एवं बकरी के दूध में उच्च गुणवत्ता के प्रोटीन, जैव-सक्रिय तत्व तथा खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इन्हें फंक्शनल फूड एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स के रूप में वैश्विक पहचान मिल रही है। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता एवं वैज्ञानिक प्रमाणों के कारण गैर-गोवंशीय दुग्ध उत्पादों की घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ऊँटनी एवं बकरी का दूध उच्च गुणवत्ता वाले मिल्क पाउडर, विशिष्ट पनीर, प्रोबायोटिक उत्पादों एवं न्यूट्रास्यूटिकल्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण व्यावसायिक भूमिका निभाएगा। इस बढ़ती मांग का लाभ पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए आधुनिक प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, शीत श्रृंखला एवं सुदृढ़ विपणन तंत्र विकसित करना समय की आवश्यकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय को नई मजबूती मिल सके।
केन्‍द्र निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ.अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि देश का वर्तमान वार्षिक दुग्ध उत्पादन 248 मिलियन टन से अधिक है तथा वैश्विक दुग्ध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। विश्व दुग्ध दिवस हमें यह संदेश देता है कि भविष्य की दुग्ध अर्थव्यवस्था पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ नॉन-बोवाइन दुग्ध की संभावनाओं को भी समाहित करेगी। ऊँटनी बकरी तथा अन्य पशुओं से प्राप्त दूध पोषण, स्वास्थ्य और कार्यात्मक खाद्य (फंक्शनल फूड) के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान कर रहे हैं। इनमें ऊँटनी का दूध अपनी विशिष्ट पोषणीय एवं औषधीय गुणधर्मों के कारण विशेष महत्व रखता है। अनुसंधान, नवाचार और जन-जागरूकता के माध्यम से नॉन-बोवाइन दुग्ध क्षेत्र ग्रामीण आजीविका, पोषण सुरक्षा और मूल्य-संवर्धित उद्यमिता का एक सशक्त आधार बन सकता है।
कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. राजेन्‍द्र कुमार, प्रभारी, डेयरी प्रौद्योगिकी एवं प्रसंस्‍करण इकाई ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा बताया कि गैर-गौवंशीय दूध को लेकर प्रतिभागियों की व्‍यावहारिक एवं नीतिगत जिज्ञासाओं का वक्‍ता द्वारा उचित निराकरण भी प्रस्‍तुत किया गया। जिसमें एनआरसीसी सहित राजुवास, बीकानेर, एनडीआरआई, करनाल, गड़वासु, लुधियाना आदि से लगभग 80 से अधिक प्रतिभागियों ने वचुर्अल रूप से इसमें सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम समन्‍यवकों में डॉ. श्‍याम सुंदर चौधरी, डॉ. मितुल बुंबडिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की तथा डॉ. श्रीशैलम ने धन्‍यवाद प्रस्‍ताव ज्ञापित किया। इस अवसर पर भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के शुभारम्भ के संदर्भ में माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा डॉ. मांगीलाल जाट, महानिदेशक, आईसीएआर, नई दिल्ली द्वारा जारी वीडियो संदेश एवं जन-जागरूकता अपील का भी प्रदर्शन किया गया।

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