विशेष संवाददाता
बीकानेर। नगर निगम चुनाव की आहट के साथ ही शहर की सबसे चर्चित सीट बन गया है वार्ड नंबर 2 इस बार महापौर का पद सामान्य वर्ग पुरुष के लिए आरक्षित होने की चर्चा के बाद इस वार्ड की सियासी सरगर्मी सातवें आसमान पर है।
पिछली बार नाम मात्र वोटों से चुनाव हारने वाले दीपक व्यास की दावेदारी इस बार सबसे प्रबल मानी जा रही है। वजह भी साफ है। पूर्व शहर जिलाध्यक्ष रामकिशन आचार्य के भांजे दीपक व्यास पिछले चुनाव की हार के बाद से लगातार मैदान में डटे हुए हैं। वर्तमान में जस्सूसर मंडल में महामंत्री के पद पर रहते हुए पार्टी के हर कार्यक्रम में उनकी सक्रियता ने आलाकमान तक उनकी मजबूत पैठ बना दी है। सबसे बड़ा दांव उन्होंने मतदाता सूची में खेला है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो व्यास ने चुपचाप अपने सैकड़ों वोटर जो रहते तो इस वार्ड में थे लेकिन नाम पहले अन्य वार्डों में थे, उन्हें वार्ड नंबर 2 में शिफ्ट करवा दिया है। यह मास्टर स्ट्रोक उनकी जीत की नींव को मजबूत कर रहा है।
वहीं टिकट के लिए जोर आजमाइश करने वालों में कई पुराने चेहरे भी हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया था। पार्टी ऐसे चेहरों को लेकर बेहद सख्त है, इसलिए उनकी दाल गलती नजर नहीं आ रही। टिकट की दौड़ में तीन नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं –
राम शंकर रंगा परिवार की पृष्ठभूमि भले ही संघ की रही हो, लेकिन पार्टी उनकी व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ का बारीकी से आकलन कर रही है। राजेंद्र ओझा नाम भाजपा परिवार से है, लेकिन लंबे समय से निष्क्रियता के चलते उन पर भी तलवार लटक रही है। तनुज सारस्वत दौड़ में शामिल जरूर हैं, पर जमीनी सक्रियता में व्यास से पीछे माने जा रहे हैं। कुल मिलाकर वार्ड नंबर 2 का सियासी गणित साफ इशारा कर रहा है मुकाबला कड़ा है, लेकिन टिकट की बाजी दीपक व्यास के पक्ष में पलटती दिख रही है। अब देखना होगा कि पार्टी किस पर दांव खेलती है।




