गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को, मध्याह्न में विशेष रहेगा गणेश पूजन का मुहूर्त…

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सुबह 9:19 से 10:43 तक शुभ चौघड़िया, दोपहर 1:54 से सूर्यास्त तक चर-लाभ-अमृत के मुहूर्त

बीकानेर। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला भगवान श्री गणेश का पावन पर्व गणेश चतुर्थी इस वर्ष 14 सितंबर 2026, सोमवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाएगा। इस दिन घरों, प्रतिष्ठानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।

ज्योतिषाचार्य मोहित बिस्सा ने बताया कि गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की स्थापना एवं पूजन के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया गया है। 14 सितंबर को प्रातः 11:09 बजे से दोपहर 1:21 बजे तक गणेश पूजन का विशेष मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में वृश्चिक लग्न रहने के कारण इसे गणेश पूजन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना गया है।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त सुबह 9:19 बजे से 10:43 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा। वहीं दोपहर 1:54 बजे से सूर्यास्त तक चर, लाभ एवं अमृत के चौघड़िये रहेंगे। श्रद्धालु अपनी सुविधा एवं परंपरा के अनुसार इन समयों में भी गणेश पूजन कर सकते हैं।

दूर्वा और लाल पुष्प अर्पित करना विशेष शुभ

गणेश चतुर्थी के दिन प्रातः स्नान कर पूजा स्थल की स्वच्छता के बाद भगवान श्री गणेश की स्थापना करनी चाहिए। पूजन में दूर्वा, लाल पुष्प, अक्षत, सिंदूर, हल्दी, चंदन, पान, सुपारी, नारियल, धूप, दीप एवं नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना गया है। गणेश चालीसा अथवा श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने के बाद आरती एवं प्रार्थना करनी चाहिए।

ज्योतिषाचार्य मोहित बिस्सा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचना चाहिए। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत अथवा उपवास रखें और सात्त्विक आहार ग्रहण करें।

25 सितंबर को गणपति विसर्जन

इस वर्ष गणपति विसर्जन 25 सितंबर 2026 को किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक जलस्रोत में विसर्जन संभव न होने पर घर में ही कृत्रिम टब अथवा टैंक में विसर्जन करना उचित रहेगा।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश बुद्धि, विवेक, शुभारंभ और विघ्न-विनाश के प्रतीक हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मकता, अनुशासन और मंगल भाव अपनाने का संदेश देता है।

॥ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

— ज्योतिषाचार्य मोहित बिस्सा
AstroWithMohit

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