गुरु पूर्णिमा पर बीकानेर के आनंद आश्रम में परम पूज्य श्री 1008 क्षमाराम जी महाराज के सान्निध्य में हुआ शुभारंभ
बीकानेर। गुरु पूर्णिमा के पावन एवं आध्यात्मिक पर्व पर भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक ओर महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई। बीकानेर स्थित आनंद आश्रम में परम पूज्य श्री 1008 क्षमाराम जी महाराज के पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद से ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि डिजिटाइजेशन इकाई का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया गया।
परम पूज्य श्री 1008 क्षमाराम जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक विरासत का अमूल्य आधार हैं। इनका संरक्षण केवल इतिहास को सुरक्षित रखने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक भारत के शाश्वत ज्ञान को पहुँचाने का राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने ज्ञान भारतम् मिशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र सेवा का महत्त्वपूर्ण अभियान बताया।
राजस्थान आज ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि डिजिटाइजेशन कार्य में पूरे देश में अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। राजस्थान सरकार की कला एवं संस्कृति विभाग की सचिव सूची त्यागी जी के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में पूरे प्रदेश में वर्तमान में 15 डिजिटाइजेशन केंद्रों पर कार्य संचालित हो रहा है ओर इस कड़ी में बीकानेर के तीन केंद्र भी सक्रिय रूप से पांडुलिपियों के डिजिटाइजेशन एवं संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। इन्हीं सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप राजस्थान आज इस अभियान में देश में प्रथम पायदान पर है। साथ ही प्रदेश में पाँच नए डिजिटाइजेशन केंद्र शीघ्र प्रारंभ किए जाने की तैयारी भी अंतिम चरण में है।
ज्ञान भारतम् मिशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि इन डिजिटाइजेशन इकाई के माध्यम से राजस्थान के क्षेत्रों में उपलब्ध दुर्लभ पांडुलिपियों का उत्कृष्ट उपकरणों से डिजिटाइजेशन एवं वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण किया जाएगा, जिससे यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रहने के साथ-साथ शोधार्थियों एवं विद्वानों के लिए भी सुलभ हो सकेगी।








