अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाला ही गुरु है : विमर्शानंद जी महाराज

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बीकानेर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बीकानेर महानगर इकाई एवं आईएएसई (टी.टी. कॉलेज) के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय आईएएसई (टी.टी. कॉलेज) में आदरणीय मूलचंद वोहरा के मार्गदर्शन में गुरुपूर्णिमा उत्सव गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित हुआ।
लालेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश विमर्शानंद जी महाराज ने कहा कि गुरु वही है, जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाए। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है और उसका सान्निध्य जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
मुख्य वक्ता डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जीवन-निर्माण में गुरु की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि संस्कार, दृष्टि और जीवन-मूल्यों का भी संवाहक होता है।
वरिष्ठ साहित्यकार मोनिका गौड़ ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएएसई के प्राचार्य प्रो. मनोज कुमार आर्य ने की। शुभारंभ अरुण कुमार जोशी की गुरु-वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान भावना सोनी, अरुणा बैंस तथा गीता बलवदा ने माल्यार्पण, श्रीफल एवं उत्तरीय अर्पित कर किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन एवं संयोजन डॉ. जयदेव बिठू ने किया।
गुरुपूर्णिमा के अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश कुमार सोनी के दो उपन्यासों का विमोचन विमर्शानंद जी महाराज के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अखिल भारतीय लोक आयाम प्रमुख डॉ. अन्नाराम शर्मा, डॉ. शिवराज भारतीय, जगदीश रतनू, के.एल. बिश्नोई, के.के. शर्मा, गिरधरदान रतनू, रेणु वर्मा, कैलाश टाक, रीता आहूजा भुवनेश्वरी राजोरिया,किशनलाल , बह्मदेव सैनी, अरशद अली, राधाकिशन हुड्डा, निशा जनागल,कपिल यादव,रवि, जगदीश, जितेंद्र,मोहिनी,देवी, सहित संस्थान के प्राध्यापक, विद्यार्थी, साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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