कलाकार अमूर्त को मूर्त बना देता है – डॉ. राकेश किराडू

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare


बीकानेर।अजित फाउण्डेशन द्वारा लोककला ‘‘फड़ चित्रकला’’ पर आयोजित कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक सुप्रसिद्ध चित्रकार एवं प्रोफेसर महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय डॉ. राकेश किराडू ने कहा कि कोई भी कलाकार हो उसको लोककलाओं से जुड़े रहना जरूरी है। जब तक लोक को वह जानेगा नहीं तब तक वह अपनी संस्कृति को नहीं पहचान पायेंगा। डॉ. किराडू ने कहा कि कलाकार निराकार को साकार बना देता है, अमूर्त को मूर्त रूप दे देता है। फड़ चित्रकला के बारे में बताते हुए कहा कि फड़ शैली राजस्थान में भीलवाड़ा तक सीमित रह गई है, हमें प्रयास करने होगें कि इस लोककला को जन-जन तक पहुंचाए। डॉ. किराडू ने चित्रकला की अलग-अलग शैलियों के बारे में बताते हुए कहा कि हम चित्रों की बनावट एवं रंग-संयोजन से चित्रशैली को पहचान सकते है। डॉ. राकेश किराड़ू के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यषाला में फड़ बनाना एवं उसके इतिहास, तकनीक एवं रंग संयोजन के बारे में सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक रूप से बतलाया जाएगा।
कार्यषाला के दौरान जयश्री सुथार, निशा सुथार एवं राम भादाणी ने प्रतिभागियों को मानवाकृति चित्रण एवं तकनीक के बारे में प्रायोगिक रूप से बताया।
संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कार्यक्रम के आरम्भ में फड़ कार्यशाला के उद्देश्य को बताते हुए कहा कि एक सप्ताह आयोजित इस कार्यशाला में हम लर्निंग बाई डूईंग सिद्धान्त पर कार्य करते हुए कार्य करेगें। साथ ही इस लोककला के संर्वद्धन हेतु प्रयास करेगें।
फड़ चित्रकला कार्यशाला में लगभग 52 युवा-युवतियां बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे है।
भवदीय
संजय श्रीमाली
कार्यक्रम समन्वयक
अजित फाउण्डेशन
बीकानेर
मो. 7014198275

Categories:
error: Content is protected !!