ओम माथुर की सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई:छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाई थी, पार्टी ने सर्वोच्च पद पर बैठाया

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ओम माथुर की सक्रिय राजनीति से सम्मानजनक विदाई:छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत दिलाई थी, पार्टी ने सर्वोच्च पद पर बैठाया

36 साल की सक्रिय राजनीति के बाद राजस्थान के ओम प्रकाश माथुर को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है। संघ पृष्ठभूमि से जुड़े माथुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीबी नेताओं में से एक हैं।

जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय माथुर गुजरात के प्रभारी बनाए गए थे। सियासी जानकारों की मानें तो ये उनकी (ओम प्रकाश माथुर) सक्रिय राजनीति से सम्मान के साथ विदाई है।

सक्रिय राजनीति के तौर पर उनका अंतिम असाइनमेंट विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रभारी के तौर पर था। छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की थी। इसका श्रेय माथुर को भी जाता है।

लोकसभा चुनावों में भी माथुर छत्तीसगढ़ के प्रभारी थे, लेकिन ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। बीजेपी ने छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से 10 पर जीत दर्ज की थी।

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए मदन राठौड़ और ओम माथुर दोनों ही पाली जिले से आते हैं।

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए मदन राठौड़ और ओम माथुर दोनों ही पाली जिले से आते हैं।

कई राज्यों के प्रभारी रहे
मूल रूप से पाली (राजस्थान) जिले के फालना कस्बे के रहने वाले ओम प्रकाश माथुर का जन्म 17 अगस्त 1952 को हुआ था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा पाली में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे जयपुर आ गए थे। राजस्थान विश्वविद्यालय से उन्होंने बीए की डिग्री ली। माथुर छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। 1988 में बीजेपी के सदस्य बनने के बाद वे पार्टी में विभिन्न पदों पर रहे। 7 जनवरी 2008 से 13 जुलाई 2009 तक वे राजस्थान बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष रहे।

पार्टी ने उन्हें गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य का प्रभारी भी बनाया था। इसके अलावा माथुर केन्द्रीय संगठन में राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय महामंत्री और लंबे समय तक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर भी रहे। उन्हें पार्टी ने दो बार राजस्थान से राज्यसभा भी भेजा। उनका अंतिम राज्यसभा का कार्यकाल 2016 से 2022 तक रहा।

माथुर को राज्यपाल बनाने के सियासी मायने
ओम प्रकाश माथुर को राज्यपाल बनाने के अपने सियासी मायने भी हैं। बढ़ती उम्र के कारण अब पार्टी माथुर को ज्यादा सक्रिय जिम्मेदारी नहीं दे सकती थी। ऐसे में अपने ऐसे कार्यकर्ता जिसने पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया हो। उसकी सक्रिय राजनीति से यह एक सम्मानजनक विदाई है।

दूसरा, पार्टी अब प्रदेश में सेकेंड लाइन लीडरशिप को प्रमोट करना चाहती है। दो दिन पहले ही बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष बनाए गए मदन राठौड़ और ओम माथुर पाली जिले से आते हैं। दोनों की अदावत किसी से छिपी नहीं है। 2008 में ओम माथुर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष थे। तब मदन राठौड़ का टिकट कट गया था, जबकि उस समय राठौड़ सिटिंग एमएलए थे।

कटारिया की राज्यपाल के तौर पर दूसरी नियुक्ति
राजस्थान सरकार के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता गुलाबचंद कटारिया को पंजाब का राज्यपाल बनाया गया है। इसके साथ ही वह चंडीगढ़ के प्रशासक का पद भी संभालेंगे। इससे पहले उन्हें पिछले साल फरवरी 2023 में असम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। राज्यपाल के तौर पर यह उनकी दूसरी नियुक्ति है।

प्राइवेट स्कूल में शिक्षक रहे कटारिया ने पहली बार 1977 में चुनाव लड़ा था। वह उदयपुर शहर सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बताया जाता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में कुल 11 चुनाव लड़े, जिसमें से 9 में उन्हें जीत मिली। साल 1998 में वह सादड़ी से सांसद के तौर पर चुनाव जीते। आखिरी चुनाव 2018 में जीतकर वह 15वीं राजस्थान विधानसभा में पहुंचे। असम का राज्यपाल नियुक्त होने से पहले वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे।

हरिभाऊ किसानराव बागड़े राजस्थान के राज्यपाल
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब हरिभाऊ किसानराव बागड़े को राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। बागड़े महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिल के रहने वाले हैं। वे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं। 2014 से 2019 के बीच महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बागड़े पहली बार 1985 में विधायक चुने गए थे।

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