पूर्व कुलपति संघ ने राजस्थान विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलगुरु प्रो.भगवती प्रसाद सारस्वत का किया स्वागत

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पूर्व कुलपतियों के समृद्ध अनुभव-सामूहिक सहभागिता से राज.विवि बनेगा और अधिक सशक्त : प्रो.सारस्वत,कुलगुरु

जयपुर। 29 सितंबर, राजस्थान विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. (डॉ.) भगवती प्रसाद सारस्वत का पूर्व कुलपति संघ की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। संघ के पदाधिकारियों ने प्रो. सारस्वत को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं प्रदान की।इस अवसर पर पूर्व कुलपति संघ की ओर से राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. राजीव जैन, प्रो. श्याम लाल, राजस्थान विश्वविद्यालय एवं मत्स्य विश्वविद्यालय, अलवर के पूर्व कुलगुरु प्रो. जे.पी. यादव, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर एवं महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पूर्व कुलगुरु प्रो. पी.सी. त्रिवेदी, गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. अशोक कुमार, कोटा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. बी.एल. वर्मा तथा निर्वाण विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रो. अरविन्द अग्रवाल उपस्थित थे।

इस अवसर पर पूर्व कुलपति संघ के संगठन सचिव प्रो.पीसी त्रिवेदी ने कहा कि राजस्थान विवि देश के प्रतिष्ठित एवं ऐतिहासिक विश्वविद्यालयों में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत के व्यापक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अनुभव से विश्वविद्यालय को नई दिशा एवं प्रगतिशील गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार, अकादमिक उत्कृष्टता तथा विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने की दिशा में सभी हितधातको के सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व कुलपतियों का समृद्ध अनुभव विश्वविद्यालयों की संस्थागत स्मृति और अकादमिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूर्व कुलपति संघ राजस्थान समय समय पर विवि के विकास, अकादमिक उन्नयन और उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर आवश्यकतानुसार अपने अनुभव एवं सुझाव उपलब्ध कराता रहेगा।

कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने पूर्व कुलपति संघ द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व कुलपतियों का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण धरोहर है। विश्वविद्यालय के विकास में पूर्व कुलपतियों के अनुभव, मार्गदर्शन और सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुभवों से प्रेरणा लेते हुए विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध एवं नवाचार को और अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा और समय समय पर उनका मार्गदर्शन का लाभ विश्वविद्यालय के विकास में लिया जाएगा। पूर्व कुलपतियों की सामूहिक सहभागिता और सकारात्मक सोच के साथ विवि की अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार को और अधिक सशक्त बनाया जाएगा। उन्होंने पूर्व कुलपति संघ से भविष्य में भी निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।

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