सावधान रहे भारत, आतंकियों की मौत पर रो रहा पड़ोसी मुल्क; पाकिस्तानी मीडिया की गीदड़भभकी

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare

सावधान रहे भारत, आतंकियों की मौत पर रो रहा पड़ोसी मुल्क; पाकिस्तानी मीडिया की गीदड़भभकी

पाकिस्तानी अखबार ‘द नेशन’ का कहना है कि इस तहर की हरकतें भारत के लिए महज चुनावी स्टंट हैं। इस लेख में भारत को चेतावनी दी गई है कि अब भारत को भी सावधान रहने की जरूरत है।

सावधान रहे भारत, आतंकियों की मौत पर रो रहा पड़ोसी मुल्क; पाकिस्तानी मीडिया की गीदड़भभकी

पाकिस्तानी मीडिया ने विदेशी मीडिया की उस रिपोर्ट के बाद रोना शुरू कर दिया है, जिसमें इस बात का जिक्र है कि भारत ने आतंकियों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें मौत के घाट उतार दिया। पड़ोसी मुल्क में हो रहे भारत के दुश्मनों के खात्मे के बीच ब्रिटिश मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस कार्रवाई के पीछे भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ का हाथ है। हालांकि, भारत ने इस तरह की रिपोर्ट को खारिज किया था। इसके बावजूद अब पाकिस्तानी मीडिया का रोना शुरू हो गया है। 

विदेशी रिपोर्ट पर पाक मीडिया की गीदड़भभकी
पाकिस्तानी अखबार ‘द नेशन’ का कहना है कि इस तहर की हरकतें भारत के लिए महज चुनावी स्टंट हैं। अखबार के लेख में भारत को चेतावनी दी गई है कि अब भारत को भी सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि पाकिस्तान आत्मरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग करने से डरता नहीं है। इस लेख में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया गया है कि वे मौके पर आगे आएं और भारत के कार्यों की निंदा करें।

पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश सचिव मोहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने बीते गुरुवार को कहा कि उसके पास इस बात के सबूत हैं कि भारतीय एजेंटों ने सियालकोट और रावलकोट में दो पाकिस्तानी नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया। काजी ने कहा कि मरने वालों की पहचान शहीद लतीफ और मोहम्मद रियाज के तौर पर की गई थी। 2023 में ही इन दोनों की हत्या हुई थी। पाकिस्तान ने इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि भारत इसी तरह से कनाडा और अमेरिका में भी हत्या के प्रयास कर चुका है। 

आतंकियों के खात्में पर रो रहा पाकिस्तान
बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी 9 महीने पहले इसी तरह के निराधार दावा करते हुए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। भारत कनाडा से इस बात के सबूत मांगता रहा लेकिन अब तक कनाडा की तरफ से कोई पुख्ता सबूत नही दिया जा  सका। ऐसे में जस्टिन ट्रूडो को फजीहत भी झेलनी पड़ी। 

अब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के विदेश सचिव ने कहा कि भारत अपने देश से बाहर निकलकर दूसरे देश की सीमाओं में भी हत्या करवा रहा है। पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत का नेटवर्क कई देशों में है। उन्होंने आरोप लगयाा कि भारत के एजेंट्स को दूसरे देशों में पनाह मिलती है और इसके बाद वे पाकिस्तान में हत्याएं करवा देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की खुफिया एजेंसी आतंकियों और नागरिकों को भी इस काम के लिए हायर करकती है।  उन्होंने कहा कि हत्या के बाद ही भारत के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इसके कसीदे पढ़े जाने लगते हैं। 

पाकिस्तान ने कहा कि 11 अक्टूबर 2023 को सियालकोट में एक मस्जिद के बाहर शाहिद लतीफ की हत्या कर दी गई थी। जांच में पता चला कि एक भारतीय एजेंट योगेश कुमार ने हत्या की साजिश रची थी। उन्होंने दावा किया कि  हत्या करवाने के लिए किसी स्थानीय अपराधी का सहारा लिया जाता है। उन्होंने कहा कि हायर किए गए हत्यारे मोहम्मद उमैर को गिरफ्तार किया गया था। दूसरी हत्या के बारे में बताते हुए काजी ने कहा कि मोहम्मद रिजाय की फज्र की नमाज के दौरान रावलकोट की मस्जिद में 8 सितंबर 2023 को हत्या कर दी गई थी। 

इस हत्या के बाद हत्यारे मोहम्मद अब्दुल्ला अली को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि एक भारतीय एजेंट अशोक कुमार आनंद और योगेश कुमार के इशारे पर उसने हत्या की थी। 

काजी की बात पर भारत ने दिया करारा जवाब
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान एक मनगढ़ंत और झूठा भारत विरोधी प्रोपेगैंडा रच रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है। यहां अवैध गतिविधियां चलती ही रहती हैं। पाकिस्तान वही काटेगा जो उसने बोा है। अब वह खुद को सही साबित करने के लिए दूसरों पर इल्जाम लगा रहा है। बता दें कि भारत आए दिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को लताड़ लगाता ही रहता है। 

बता दें कि ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने दावा किया था कि पाकिस्तान में हो रहीं भारत विरोधी लोगों की हत्या के पीछे रॉ का हाथ है। इसमें यह भी कहा गया था कि रॉ का सीधा कंट्रोल प्रधानमंत्री कार्यालय से है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से ही हत्या का आदेश दिया जाता है। इसमें यह भी कहा गया कि 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद इस तरह की हत्याएं बढी हैं। बीते चार साल में ही करीब 20 को मारा जा चुका है। 

FacebookWhatsAppTelegramLinkedInXPrintCopy LinkGoogle TranslateGmailThreadsShare
Categories: ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!