नारी चेतना रो जुड़ाव मन सूं नीं बल्कि उणरै चित्त सूं है : प्रोफेसर अर्जुनदेव चारण
भारतीय समाज में आ विडम्बना रैयी कै अठै नारी नै आज लग उणरौ आपौ नीं दियौ। इणी ’ज आपै सारु वां सदियां सूं संघर्ष कर रैयी है। नारी नै उणरी सुतंत्र पहचाण रै बजाय उणनै समाज मांय संबंधां रै परवांणै न्यारा-न्यारा नाम सूं संबोधित करता रैया पण उणनै उणरी असली ओळखांण सूं सदैव अजाण राखी। अै विचार ख्यातनाम कवि-आलोचक प्रोफेसर (डाॅ.) अर्जुनदेव चारण साहित्य अकादेमी अर अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद रै भेळप में शनि वार नै गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित ‘ नारी चेतना ‘ विसयक व्याख्यान में व्यक्त करता थकां कह्यौ कै नारी चेतना रो जुड़ाव मन सूं नीं बल्कि उणरै चित्त सूं है।
इण अवसर माथै प्रोफेसर अर्जुनदेव चारण भारतीय ग्यांन परंपरा रै मुजब पौराणिक कथावां रै अंतरगत रिसी कहोड़ अर सुजाता, रिसी श्वेतकेतु अर सुवर्चला, रिसी नारायण-उर्वसी, राजा शांतनु सत्यवती, गांधारी अर द्रोपदी रै जीवण सूं जुड़ियोड़ी नारी चेतना रा महताऊ उदाहरण दैय ‘र आपरी बात राखता थकां कह्यौ कै नारी मानवीय संस्कृति रो निरमाण करणवाळी सृष्टा है।
रामायण अर महाभारत री महताऊ कथा मांय वरणित नारी चेतना रा दाखला देता थकां प्रोफेसर चारण कह्यौ कै अेकपत्नी व्रत रै परवांणै राम जठै मर्यादापुरुषोत्तम कहीजै उठै ई राधा अर मीरां रै सागै ई सोळा हजार स्त्रियां रै सागै ई सकल नारी समाज नै उणरी ओळख रौ मांण दैवणसारु ई श्रीकृष्ण सोला कलां संपूरण प्रीत - पखी पूरण - पुरुष कहीजै।
संस्कृति कांई है ? संस्कृति रै खेतर में नारी चेतना री कांई भूमिका है ? संस्कृति अर नारी रो संबंध कांई है ? नारी संस्कृति रो निरमाण किकर करै ? इण भांत रा कैई सवाला रो खुलासो करता थकां डाॅ. अर्जुनदेव चारण कह्यौ कै संस्कृति रै केंद्र में सोम (चन्द्र) होवण रै कारण इज भारतीय सांस्कृतिक परम्परा में नारी नै सोम्या कह्यौ जावै। वे कह्यौ के अेक समैं तांई भारतीय समाज में नारी नै जीवण री आजादी रैयी पण अेक समैं विसेस रै पछै अठै रौ पुरुष उणनै आपरी सुविधा मुजब बणाया नियमां नै कांण-कायदा रौ नांव दैय ‘र नारी नै बांधण री आफळ करतौ रह्यौ पण विचारकरण री बात आ है कै आज री नारी पुरुष सूं नीं बल्कि आपौआप सूं जूझ रैयी है।
इण राष्ट्रीय व्याख्यानमाला में प्रतिष्ठित समाजसेवी श्रीमती आशा बोथरा, इतिहासविद प्रोफेसर मनोरमा उपाध्याय, प्रोफेसर सरोज कौशल अर डाॅ. पद्मजा शर्मा ई आपरी बात राखी। व्याख्यानमाला रौ संयोजक डाॅ.पद्मजा शर्मा अर संचालन सुशील द्विवेदी करियौ।
समारोह रै सरुआत में मानीता मिजमान मां सुरसत रै चित्र माथै चोसरौ चढाय ‘र दीवो जळायौ । इण अंजसजोग अवसर माथै प्रोफेसर सत्यप्रकाश दूबे, प्रोफेसर कौशलनाथ उपाध्याय, प्रोफेसर के.एल. रैगर, डाॅ.गजेसिंह राजपुरोहित, डाॅ.प्रकाशदान चारण, श्री मीठेश निर्मोही,श्री दशरथ कुमार सोलंकी, डाॅ.अयोध्या प्रसाद गौड़, श्री हरिप्रकाश राठी, श्री मोहनसिंह रतनू , श्री कमलेश तिवारी, श्री आशीष चारण, श्री कल्याण बिश्नोई, डाॅ.सुदर्शन कुमार, श्री राकेश गांधी, डाॅ.नितेश व्यास, श्री अक्षय सुराणा, श्री अजय चौधरी, डाॅ. प्रमोद कुमार, प्रोफेसर कैलाश कौशल , डाॅ.सुमन बिस्सा,श्रीमती संतोष चौधरी, श्रीमती मधुर परिहार, श्रीमती सूरज माहेश्वरी, डाॅ. मनीषा डागा, डाॅ.पुष्पा गुप्ता, श्रीमती कौशल्या अग्रवाल, डाॅ.ईला चारण, श्रीमती स्वाती पुरोहित, डाॅ.रेणुका श्रीवास्तव, सुश्री सुरभि खींची, सुश्री दीपिका मोयल, श्रीमती स्वाती पुरोहित, डाॅ.रंजना उपाध्याय सागै मानीता रचनाकार अर साहित्य-प्रेमी मौजूद रैया।







