सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- सरकार पीरियड लीव पर पॉलिसी बनाए:कहा- हमने फैसला लिया तो कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने से बचेंगीं

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- सरकार पीरियड लीव पर पॉलिसी बनाए:कहा- हमने फैसला लिया तो कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने से बचेंगीं

नई दिल्ली

24 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव की मांग करने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की याचिका खारिज की थी। - Dainik Bhaskar

24 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव की मांग करने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की याचिका खारिज की थी।

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पीरियड लीव की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि यह मामला अदालत में तय करने के लिए नहीं है, बल्कि सरकारी नीति से जुड़ा मामला है।

कोर्ट ने कहा कि हमारी तरफ से महिलाओं को पीरियड लीव देने का फैसला महिलाओं के लिए हानिकारक होगा क्योंकि कंपनियां महिलाओं को नौकरी देने से बचेंगीं।

इसके साथ ही CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्राकोर्ट की बेंच ने केंद्र को निर्देश दिया कि वे राज्यों और इस मामले से जुड़े सभी लोगों की सलाह लेकर एक मॉडल पॉलिसी तैयार करें।

यह याचिका वकील शैलेंद्र तिवारी ने लगाई है। उनकी तरफ से वकील राकेश खन्ना ने सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश कीं।

कोर्ट ने कहा- ऐसी लीव के चलते महिलाओं को काम से दूर दिया जाएगा
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि यह लीव औरतों को काम करने के लिए कैसे प्रोत्साहित करेगी। ऐसी लीव मंजूर होने से महिलाओं को काम से अलग कर दिया जाएगा। हम नहीं चाहते महिलाओं के साथ ऐसा हो। क्योंकि यह मामला अन्य राज्यों की नीतियों से संबंधित समस्याएं उठाता है, इसलिए कोर्ट के पास इस मामले में दखल देने की कोई वजह ही नहीं है।

हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इजाजत दी कि वह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी और एडिशनल सॉलिसिटर ऐश्वर्य भाटी के पास जाएं। कोर्ट ने कहा कि हम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी से निवेदन करते हैं कि वे नीतियों के स्तर पर इस मामले को देखें और इससे संबंधित सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा करने के बाद पॉलिसी बनाने के बारे में सोचें।

फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी पीरियड लीव की मांग वाली याचिका
इसके पहले 24 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड लीव की मांग करने वाली छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की याचिका खारिज की थी। तब भी कोर्ट ने यही कहा था कि यह मामला नीतिगत है, इसलिए याचिकाकर्ता केंद्र के सामने अपनी बात रखें। इसे लेकर आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अब तक केंद्र ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।

2023 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पीरियड लीव को गलत बताया था
13 दिसंबर 2023 को संसद में तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी से पीरियड के दौरान पेड लीव के बारे में सवाल पूछा गया था। ईरानी ने इस पर कहा था की महिलाओं को ऐसी किसी लीव की कोई जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि यह जीवन का बहुत नेचुरल हिस्सा है और इससे किसी तरह की कमजोरी नहीं मानना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिला के तौर पर मैं जानती हूं कि पीरियड्स और मेंस्ट्रुएशन साइकिल परेशानी की बात नहीं हैं। पीरियड्स के दौरान ऑफिस से लीव मिलना महिलाओं से भेदभाव का कारण बन सकता है। कई लोग जो खुद मेंस्ट्रुएट नहीं करते हैं, लेकिन इसे लेकर अलग सोच रखते हैं। हमें उनकी सोच को आधार बनाकर ऐसे मुद्दों को नहीं उठाना चाहिए जिससे महिलाओं को समान अवसर मिलने कम हो जाएं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेड लीव (छुट्टी) दिए से जुड़े राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज कुमार के सवाल पर यह जवाब दिया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेड लीव (छुट्टी) दिए से जुड़े राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज कुमार के सवाल पर यह जवाब दिया था।

जापान और साउथ कोरिया में मिलती है पीरियड्स लीव, शर्म और स्टिग्मा की वजह से महिलाएं नहीं लेती छुट्टी
जापान और साउथ कोरिया में महिलाओं को पीरियड्स के लिए छुट्टी मिलती है। लेकिन वहां भी महिलाएं इस छुट्टी का इस्तेमाल नहीं करती हैं। जापान में 1947 में लेबर राइट्स कंसर्न के तहत पीरियड लीव पॉलिसी आई।

जापान की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट बताती है कि साल 1965 में केवल 26% महिलाओं ने इस छुट्टी का इस्तेमाल किया। लेकिन वक्त के साथ ये आंकड़ा और कम हो गया। वहां की सरकार ने साल 2017 में एक सर्वे कराया, उसमें ये बात सामने आई कि सिर्फ 0.9% महिलाओं ने ही पीरियड लीव अप्लाय की थीं।

साउथ कोरिया में भी यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है। 2013 के एक सर्वेक्षण में 23.6% दक्षिण कोरियाई महिलाओं ने इस छुट्टी का इस्तेमाल किया, जबकि 2017 में यह दर गिरकर 19.7% हो गई। दोनों ही देशों में महिलाएं पीरियड्स के दौरान मिलने वाली छुट्टी इसलिए नहीं लेतीं क्योंकि उन्हें पीरियड्स से जुड़ी संस्कृति और वर्क प्लेस पर भेदभाव का डर होता है।

साउथ कोरिया में पुरुषों के अधिकार के लिए काम करने वाले ग्रुप ‘मैन ऑफ कोरिया’ के प्रमुख सुंग जे-गी ने साल 2012 में ट्विटर पर इसे लेकर बेहद आपत्तिजनक पोस्ट किया। सुंग ने अपने ट्वीट में लिखा- ‘तुम (महिलाओं) को खुद पर शर्म आनी चाहिए। जब देश की जन्म दर दुनिया में सबसे कम है तो आप पीरियड्स को लेकर इतना हंगामा क्यों कर रही हैं?’

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