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सर्दियों में बढ़ते है हर्ट अटैक के केस:विशेषज्ञ बोले, बचने के लिए मरीज पीते रहे गर्म पानी; नई तकनीक से 100 फीसदी ब्लॉकेज में भी डाले जा सकते है स्टेंट्स

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सर्दियों में बढ़ते है हर्ट अटैक के केस:विशेषज्ञ बोले, बचने के लिए मरीज पीते रहे गर्म पानी; नई तकनीक से 100 फीसदी ब्लॉकेज में भी डाले जा सकते है स्टेंट्स

सर्दियां आने के साथ ही दिल के मरीजों की धड़कनें भी बढ़ जाती है। इस सीजन में ही सबसे ज्यादा हर्ट अटैक के केस आते है। अटैक आने का सबसे ज्यादा खतरा मध्य रात में रहता है, जब सर्दी चरम पर होती है। ऐसे में इस अटैक से बचने के लिए दिल के मरीजों को पूरे दिन कुछ-कुछ घंटे के अंतराल में गर्म पानी पीते रहना चाहिए, ताकि उनका ब्लड सर्कुलेशन नॉर्मल बना रहे।

जयपुर के मंगलम प्लस मेडिसिटी हॉस्पिटल वरिष्ठ और अनुभवी ह्रदय रोग विशेषज्ञ की माने तो दिल के मरीज जिनके ब्लॉकेज है उनको इस समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। हॉस्पिटल के हृदय रोग विभाग के चेयरमैन डॉ. दीपेंद्र भटनागर ने बताया कि शहरों में लोगों को समय पर इलाज मिल जाता है, लेकिन गांवों में ऐसा नहीं होता। इलाज देरी से मिलने के कारण अक्सर गांवों में हर्ट अटैक से ज्यादा मौत होती है।

उन्होंने बताया कि आजकल ऐसी-ऐसी तकनीक आ गई है कि 100 फीसदी ब्लॉकेज जिनके बाइपास की जरूरत होती है उनको एंजियोप्लास्टी के जरिए स्टेंट्स डालकर ब्लॉकेज का अच्छे से इलाज किया जा सकता है।

डॉ.भटनागर ने बताया कि हमारे हॉस्पिटल में भी उत्तर भारत की सबसे बेहतर कैथ लैब है जहां हृदय रोग उपचार के सर्वश्रेष्ठ उपकरण उपलब्ध है , जिनमे लेजर (एल्का), रोटा प्रो, ओसीटी, आइवस, एफएफआर, तथा आईवीएल शामिल हैं। इनसे अत्याधिक कैल्शियम के साथ रुकावट वाले ब्लॉकेज भी कम से कम डाई के साथ सफलतापूर्वक खोले जा सकते हैं।

विभाग के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ माथुर ने बताया कि हॉस्पिटल में अब हर प्रकार की जटिल एवं प्राइमरी एंजियोप्लास्टी संभव है। साथ ही पुराने 100 प्रतिशत ब्लॉकेज में भी सफलतापूर्वक स्टेंट्स डाले जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बाइफर्केशन स्टेंटिंग तकनीक, रोटाबलेशन, लेजर, आवीएल के जरिए जटिल एंजियोप्लास्टी को संभव कर बाइपास सर्जरी के विकल्प में स्टेंट से ही बेहतर इलाज किया जा सकता है।

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