डॉ. मनीषा शर्मा
लिपि विशेषज्ञ (प्राचीन नागरी
संपादन: शिक्षा कौस्तुभ शोध पत्रिका
प्राचार्य- राज. शिक्षक प्रशिक्षण विद्यापीठ जयपुर

वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने चौथा अवतार नृसिंह के रूप में प्रकट होकर पृथ्वी हो रहे अत्याचारों का दमन दमन किया था। इस शुभ अवसर पर नरसिंह कवच की हस्तलिखित पांडुलिपि का प्रकाशन किया जा रहा है, पंडित श्री राम चन्द्र लिखित य़ह पांडुलिपि बीकानेर आँचल में संवत 1735 में लिखी गयी, जिसमे बीज मंत्रो से भगवान नरसिंह का कवच बड़ा चमत्कारी बनाया है ।इसका संपादन मेरे द्वारा किया जा रहा है सर्व बधाओ से मुक्ति के लिए कवच के पाठ का विधान लिपिकार ने पुष्पिका में लिखा है ।बीज मंत्रो को शुद्ध करके अन्य पाठ भेदों से परिष्कृत कर इस कवच का प्रकाशन किया जा रहा है ।अभय जैन ग्रंथालय में निहित दो प्रतियो से इसका मिलान किया गया है। मध्य के कुछ भाग को प्रकाशनार्थ रखा गया है।


कवच पाठ –
ॐ नमोनृसिंहाय सर्व दुष्ट विनाशनाय सर्वंजन मोहनाय सर्वराज्यंवश्यं कुरु कुरु स्वाहा।
ॐ नमो नृसिंहाय सिंहराजाय नरकेशाय नमो नम:
ॐ नमो कालाय काल द्रष्ट्राय कराल वदनाय ॐ उग्राय उग्र वीराय उग्र विकटाय उग्र वज्राय वज्र देहिने रुद्राय रुद्र घोराय भद्राय भद्रकारिणे
ॐ ज्रीं ज्रीं ह्रीं ह्रीं क्षी क्षी नृसिंहाय
कपिल जटाय अमोघवाचाय ॐस्वाहा उग्र प्रचण्ड रुपाय स्वाहा
ॐ ह्रौं ह्रौं ह्रीं ह्रीं ह्रुं ह्रुं क्ष्रौं क्ष्रौंक्ष्रं क्ष्रं फट् स्वाहा।
ॐ नमो नृसिंहाय कपिल जटाय ममः सर्व रोगान् बन्ध बन्ध, सर्व ग्रहान बन्ध बन्ध, सर्व दोषादीनां बन्ध बन्ध, सर्व वृश्चिकादिनां विषं बन्ध बन्ध, सर्व भूत प्रेत, पिशाच, डाकिनी शाकिनी, यंत्र मंत्रादीन् बन्ध बन्ध, कीलय कीलय चूर्णय चूर्णय, मर्दय मर्दय, ऐं ऐं एहि एहि, मम येये विरोधिन्स्तान् सर्वान् सर्वतो हन हन, दह दह, मथ मथ, पच पच, चक्रेण, गदा, वज्रेण भष्मी कुरु कुरु स्वाहा।
इति नृसिंह कवच !! ब्रह्म सावित्री संवादे नृसिंह पुराण अर्न्तगत कवच सम्पूर्णम !!














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