ट्रम्प ने स्मार्टफोन-कंप्यूटर से रेसिप्रोकल टैरिफ हटाया:सेमीकंडक्टर, सोलर सेल और मेमोरी कार्ड को भी छूट; फैसले से अमेरिकी टेक कंपनियों को राहत

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ट्रम्प ने स्मार्टफोन-कंप्यूटर से रेसिप्रोकल टैरिफ हटाया:सेमीकंडक्टर, सोलर सेल और मेमोरी कार्ड को भी छूट; फैसले से अमेरिकी टेक कंपनियों को राहत

ट्रम्प ने चीन पर 145% टैरिफ का ऐलान किया है, इससे अमेरिका की एपल जैसी कंपनियां जो अपने ज्यादातर प्रोडक्ट्स चीन में बनाती हैं, मुश्किल में पड़ सकती हैं। - Dainik Bhaskar

ट्रम्प ने चीन पर 145% टैरिफ का ऐलान किया है, इससे अमेरिका की एपल जैसी कंपनियां जो अपने ज्यादातर प्रोडक्ट्स चीन में बनाती हैं, मुश्किल में पड़ सकती हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट को रेसिप्रोकल (जैसे को तैसा) टैरिफ से छूट दे दी। यह घोषणा ऐसे वक्त पर की गई, जब कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने विदेशी वस्तुओं पर एक सदी में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया था।

अमेरिका कस्टम एंड बॉर्डर पेट्रोल (CBP) ने नोटिस जारी कर कहा कि छूट में चीन से अमेरिका आने वाले स्मार्टफोन और उसके इक्विपमेंट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामान शामिल हैं, जिन पर हाल ही में 145% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया गया था।

CBP के नोटिस में सेमीकंडक्टर, सोलर सेल, फ्लैट पैनल टीवी डिस्प्ले, फ्लैश ड्राइव और मेमोरी कार्ड को भी छूट दी गई। इस फैसले को कई अमेरिकी टेक कंपनियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

इन कंपनियों ने हाल ही में चिंता जाहिर की थी कि टैरिफ के फैसले से अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि कई प्रोडक्ट्स चीन में बनते हैं।

एपल को सबसे बड़ी राहत इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां खास तौर पर एपल के लिए टैरिफ में छूट बड़ी राहत मानी जा रही है। जब से अमेरिका ने चीन पर टैरिफ की दरों को बढ़ाकर 145% किया था, तब से एपल को 1 हजार डॉलर के हर आईफोन पर लगभग 700 डॉलर के इम्पोर्ट टैक्स का सामना करना पड़ रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 90% आईफोन चीन में ही बनाए जाते हैं।

CBP के नोटिस में सेमीकंडक्टर को ज्यादातर अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए बेसलाइन 10% टैरिफ और चीन पर लगाए गए 125% एक्स्ट्रा टैरिफ से भी बाहर रखा गया है।

अमेरिका का चीन पर 145% तो बाकी देशों पर 10% टैरिफ अमेरिका ने 10 अप्रैल को चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 145% कर दिया था। यह कार्रवाई चीन की तरफ से अमेरिका पर लगाए गए 84% टैरिफ से जवाब में की गई थी। जैसे ही अमेरिका ने टैरिफ को दरों को बढ़ाकर 145% किया, चीन ने भी पलटवार करते हुए यूएस पर 125% टैरिफ लगा दिया था।

हालांकि इस टैरिफ वॉर के बीच अमेरिका ने भारत समेत 75 से ज्यादा देशों से सभी देशों के लिए एक जैसे बेसलाइन 10% टैरिफ का ऐलान किया था।

चीन ने कहा था- झुकने के बजाय आखिर तक लड़ेंगे अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ वॉर के बीच चीन ने कुछ दिन पहले कहा था कि वह अमेरिका के आगे ‘जबरदस्ती’ झुकने के बजाय आखिर तक लड़ना चुनेगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन उकसावे से नहीं डरता, वह पीछे नहीं हटेगा।

माओ निंग ने सोशल मीडिया पर कई सारे पोस्ट शेयर किए थे। इसमें एक पूर्व चीनी नेता माओ जेदोंग का भी वीडियो था। उसमें माओ कह रहे हैं- हम चीनी हैं। हम उकसावे से नहीं डरते। हम पीछे नहीं हटते। यह वीडियो 1953 का है जब कोरियाई जंग में चीन और अमेरिका अप्रत्यक्ष तौर पर आमने-सामने थे।

वीडियो में माओ कहते हैं- यह जंग कब तक चलेगी, यह हम नहीं तय कर सकते। यह राष्ट्रपति ट्रूमैन या फिर आइजनहावर या फिर जो नया राष्ट्रपति बनेगा, उस पर निर्भर करता है। चाहे यह जंग कितनी भी लंबी क्यों न चले, हम कभी भी नहीं झुकेंगे। हम तब तक लड़ेंगे जब तक हम पूरी तरह से जीत नहीं जाते।

माओ निंग ने एक दूसरे पोस्ट में एक तस्वीर शेयर की थी। इसमें यह बताया गया है कि कीमत मंहगी होने के बाद भी अमेरिकी चीनी सामान ही खरीदेंगे।

चीन नई इंडस्ट्री व इनोवेशन बढ़ाने पर जोर दे रहा चीन के पास अमेरिका के करीब 600 अरब पाउंड (करीब 760 अरब डॉलर) के सरकारी बॉन्ड हैं। मतलब ये कि चीन के पास अमेरिकी इकोनॉमी को प्रभावित करने की बड़ी ताकत है। वहीं, चीन ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है।

चीन ने 1.9 लाख करोड़ डॉलर का अतिरिक्त लोन इंडस्ट्रियल सेक्टर को दिया है। इससे यहां फैक्ट्रियों का निर्माण और अपग्रेडेशन तेज हुआ। हुआवेई ने शंघाई में 35,000 इंजीनियरों के लिए एक रिसर्च सेंटर खोला है, जो गूगल के कैलिफोर्निया हेडक्वार्टर से 10 गुना बड़ा है। इससे टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कैपेसिटी तेज होगी।

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