33 कोटि देवी-देवताओं का साक्षात् पूजन है गौमाता की सेवा : धरम कुलरिया
नंदनवन गौशाला की 14वीं वर्षगांठ पर भामाशाहों व गौसेवकों का हुआ सम्मान
दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखती है गौसेवा : संत श्रीसुखदेवजी महाराज
बीकानेर। गौसेवा यानि 33 कोटि देवी-देवताओं की साक्षात् पूजा करना है। गौमाता की सेवा आपके दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की ताकत रखती है। यह उद्गार भामाशाह धरम कुलरिया ने गडिय़ाला फांटा स्थित नंदनवन गौशाला के वार्षिकोत्सव में व्यक्त किए। भामाशाह धरम कुलरिया ने कहा कि हजारों गायों की सेवा में चारा-पानी व चिकित्सा आदि अनेक व्यवस्थाओं का ध्यान रखना बेहद कठिन कार्य है और इस कठिन कार्य को विगत 14 वर्षों से संत श्रीसुखदेवजी महाराज बखूबी निभा रहे हैं। आयोजन से जुड़े घनश्याम रामावत ने बताया कि नंदनवन गौशाला के 15वें वर्ष में प्रवेश के साथ ही मंगलवार को भामाशाहों व गौसेवकों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर ब्रह्मलीन गौसेवी संत श्रीपदमारामजी कुलरिया के सुपुत्र भामाशाह धरम कुलरिया सिलवा का मुख्य आतिथ्य रहा तथा साध्वी सुशीला बाईसा का सान्निध्य रहा। समारोह में रतन कोठारी इरोड, रतन मोदी कटक, युद्धवीर सिंह भाटी डुकसा, रघुवीर दान मंडाल, बच्चन सिंह बीदावत, वीएसएलपी लिग्नाइट गुड़ा, द्वारकाप्रसाद राठी, भंवरलाल साध, बाबूलाल साध, जुगल राठी व पिंटू राठी का विशिष्ट आत्थ्यि रहा। समारोह को सम्बोधित करते हुए संत श्रीसुखदेवजी महाराज ने कहा कि हजारों गायों के चारा-पानी व चिकित्सा के साथ छपरे आदि अनेक व्यवस्थाओं में भामाशाहों व गौसेवकों का सहयोग रहता है। भामाशाहों के सहयोग से गौशाला संचालन को बल मिलता है और सेवा का बड़ा सौपान सफलतापूर्वक सम्पन्न होता है। गौशाला में बीमार, विकलांग गायों की चिकित्सा आदि की व्यवस्था भी समर्पण भाव से की जा रही है।
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