बड़ा खुलासा: देश की सुरक्षा दांव पर लगाकर पड़ोसी मुल्क के लिए जासूसी करते पकड़े गए सैन्य अधिकारी, उच्च स्तरीय जांच शुरू
देश की खुफिया एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा उल्लंघन से जुड़े एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया है, जिसमें कुछ सैन्य अधिकारियों पर आरोप है कि वह पड़ोसी मुल्क के लिए जासूसी कर रहे थे.
REPORT BY SAHIL PATHAN
खुफिया एजेंसियों ने साइबर सुरक्षा उल्लंघन (Cyber Security Breach) के एक बडे़ मामले का भंडाफोड़ किया है. जिसमें सैन्य (Military) अधिकारियों पर संदेह है कि वह पड़ोसी देश के लिए जासूसी से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे. समाचार theinternalnews.co के अनुसार, मामले में रक्षा से जुड़े सूत्र का कहना है, ‘सेना और खुफिया एजेंसियों (Intelligence Agencies) ने कुछ सैन्य अधिकारियों द्वारा साइबर सुरक्षा उल्लंघन का खुलासा किया है, जिसके पड़ोसी देश के लिए जासूसी से संबंधित गतिविधियों से जुड़े होने की संभावना है.’ TIN से रक्षा मामलों की जानकारी रखने वाले सूत्र ने कहा, ‘ये उल्लंघन कुछ व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए किया जा रहा था.’आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के सवाल पर सूत्र ने बताया, ‘जांच के तुरंत आदेश दिए गए थे, जो अभी चल रही है. सैन्य अधिकारी अगर मौजूदा आदेशों का उल्लंघन करें, जिसमें खासतौर पर काउंटर इंटेलीजेंस से जुड़े मामले शामिल हों, तो उनसे सख्त तरीके से निपटा जाता है. क्योंकि ये आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के अधीन आते हैं.’ सूत्रों का कहना है कि जारी जांच में जो भी अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
अधिक जानकारी देने से किया इनकार
जब मामले में और अधिक जानकारी देने को कहा गया तो सूत्र ने कहा, ‘संवेदनशीलता और जांच की प्रकृति को देखते हुए हम उल्लंघन के मामले में अटकलों से बचने या इसमें शामिल कर्मियों तक पहुंच को रोकने के लिए अधिक जानकारी नहीं दे सकते, क्योंकि इससे जांच पर प्रभाव पड़ सकता है.’ आपको बता दें, हाल के समय में संदिग्ध पाकिस्तानी और चीनी खुफिया कर्मी सेना और उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखने और उनसे जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने के मकसद से सोशल मीडिया के जरिए सैन्य कर्मियों से जुड़ने की कोशिश करते हैं और उन्हें निशाना बनाते हैं.
कई बार फेल हो जाती हैं कोशिशें
हालांकि इस तरह की कोशिशें बहुत बार फेल हो जाती हैं, लेकिन वे फिर भी कुछ सैन्य कर्मियों को अपने जाल में फंसाकर जानकारी निकाल ही लेते हैं. यही वजह है कि अधिकारियों से समय-समय पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम) और दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा जाता है. ताकि इस तरह के मामलों से बचा जा सके. इससे पहले भी ऐसे ही कई मामले सामने आ चुके हैं. जिनसे सख्त तरीके से निपटा भी गया है. दोषी पाए गए लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाती है.








