आगरा में पूर्व सैनिकों का धरना: 19वें दिन संयुक्त मोर्चा के रूप में नई रणनीति

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आगरा में पूर्व सैनिकों का धरना: 19वें दिन संयुक्त मोर्चा के रूप में नई रणनीति

आगरा के शहीद स्मारक, संजय प्लेस पर 9 दिसंबर से चल रहे पूर्व सैनिकों के धरने को आज एक नया मोड़ मिला। 19 दिनों से न्याय और सम्मान की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन में जिले भर के तमाम पूर्व सैनिक संगठनों ने शामिल होकर इसे मजबूती दी। अब यह आंदोलन ‘संयुक्त मोर्चा’ के रूप में आगे बढ़ेगा।

धरने के मुद्दे और मांगें
पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन के दौरान पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं:

  1. पूर्व सैनिकों की जमीन को कब्जा मुक्त कराना।
  2. 60 वर्ष से अधिक उम्र के पूर्व सैनिकों को लाइन में लगने से छूट।
  3. हथियारों का रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण में प्रक्रिया सरल बनाना।
  4. छुट्टी के दौरान मृत सैनिकों की समाधि निर्माण की व्यवस्था।
  5. सरकारी नौकरी में लगे पूर्व सैनिकों की घर से 30-40 किमी के दायरे में पोस्टिंग।

धरना प्रदर्शन को 19 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इस उदासीनता के चलते पूर्व सैनिक संगठनों ने अब एकजुट होकर आंदोलन को निर्णायक रूप देने का फैसला किया है।

संयुक्त मोर्चा का गठन
आज आगरा के तमाम पूर्व सैनिक संगठनों के पदाधिकारी धरना स्थल पर जुटे। इनमें एक्स सर्विसमेन एसोसिएशन, इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन, पूर्व सैनिक सेवा संस्थान, भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति, सैनिक प्रकोष्ठ समाजवादी पार्टी, और सैनिक प्रकोष्ठ कांग्रेस पार्टी जैसे संगठन शामिल हुए। सभी ने सर्वसम्मति से ‘संयुक्त मोर्चा’ बनाकर संघर्ष को अंतिम अंजाम तक ले जाने का निर्णय लिया।

संयुक्त मोर्चा की रणनीति
संयुक्त मोर्चे के पदाधिकारियों ने फैसला किया कि प्रशासन से जल्द ही बातचीत की जाएगी। जिला अधिकारी से मुलाकात कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस आंदोलन को राजनीतिक या प्रायोजित न समझा जाए। अगर प्रशासन ने मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो धरने को आमरण अनशन में बदलने का भी निर्णय लिया गया है।

धरना स्थल पर पदाधिकारियों की उपस्थिति
आज के धरने में कई प्रमुख लोग शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

ललक सिंह (जिला संयोजक, एक्स सर्विसमेन एसोसिएशन)

रणवीर सिंह (इंडियन वेटरन ऑर्गेनाइजेशन)

सत्यदेव शर्मा (संयोजक, पूर्व सैनिक सेवा संस्थान)

रामबाबू शर्मा (जिलाध्यक्ष, पूर्व सैनिक सेवा संस्थान)

कर्नल पूरन सिंह (संस्थापक, भूतपूर्व सैनिक कल्याण समिति)

नरेंद्र यादव (जिलाध्यक्ष, सैनिक प्रकोष्ठ समाजवादी पार्टी)

डॉ. पीएस यादव (सैनिक प्रकोष्ठ कांग्रेस पार्टी)

महेश चाहर (जिलाध्यक्ष, पूर्व सैनिक संघर्ष समिति)

भोज कुमार (संगठन मंत्री)

तेजवीर सिंह (मीडिया प्रभारी)

लखेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, सुरेंद्र चाहर, और नाहर सिंह चाहर।

आंदोलन का संदेश
संयुक्त मोर्चे ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन सैनिकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए है। “हमारा उद्देश्य सरकार को हमारी न्यायपूर्ण मांगों पर ध्यान देने के लिए बाध्य करना है। यदि प्रशासन और सरकार ने इसे हल्के में लिया, तो यह संघर्ष और तीव्र होगा,” संयुक्त मोर्चे के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी।

यह धरना पूर्व सैनिकों के आत्मसम्मान और उनके हक की लड़ाई का प्रतीक बनता जा रहा है। जैसे-जैसे यह आंदोलन आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसमें आम नागरिकों और संगठनों का समर्थन भी बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाते हैं।

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