बीकानेर का हृदयविदारक दृश्य: बारिश ने उजागर की सड़क व्यवस्था की बदहाली, कीचड़ में अटकी अंतिम यात्रा

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बीकानेर का हृदयविदारक दृश्य: बारिश ने उजागर की सड़क व्यवस्था की बदहाली, कीचड़ में अटकी अंतिम यात्रा

बीकानेर | सितम्बर 2025

राजस्थान के बीकानेर जिले में हुई एक दर्दनाक घटना ने न केवल इंसानियत को झकझोर दिया, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही की परतें भी खोल दीं। नापासर कस्बे के उत्तरादा बास में 80 वर्षीय चेना देवी की अंतिम यात्रा उस समय शर्मनाक हालात में फँस गई, जब श्मशान भूमि तक जाने वाला रास्ता बारिश से कीचड़ और दलदल में बदल गया।

चेना देवी के परिजन और ग्रामीण अर्थी लेकर जैसे ही अंतिम संस्कार के लिए आगे बढ़े, रास्ता दलदल में बदल गया। किसी के पाँव धँस गए, कोई संतुलन खो बैठा, तो कोई गीली मिट्टी में दबकर मुश्किल से उठा। शोकाकुल माहौल की जगह बेबसी और अपमान की तस्वीरें सामने आईं। जिस रास्ते से होकर किसी की अंतिम यात्रा सम्मानजनक ढंग से पूरी होनी चाहिए थी, वहीं बारिश से बने गड्ढों और कीचड़ ने उस यात्रा को अपमानजनक बना दिया।


बारिश ने बिगाड़े हालात

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हल्की बारिश होते ही श्मशान भूमि तक जाने वाला यह रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाता है। इस बार भी कुछ दिन की बारिश ने इस मार्ग को दलदल में बदल दिया। बारिश ने प्रशासन की लापरवाही को और उजागर कर दिया—जहाँ वर्षों से सड़क निर्माण और मरम्मत की अनदेखी की जा रही है।

“यहाँ बारिश राहत नहीं, मुसीबत बन जाती है। सड़क पहले से ही खराब थी और बारिश ने इसे बद से बदतर कर दिया। अंतिम यात्रा जैसी पवित्र रस्म को भी अपमानित होकर निभाना पड़ा,” एक स्थानीय ग्रामीण ने रोष व्यक्त किया।


ग्रामीणों का आक्रोश और सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि वे वर्षों से इस समस्या को उठाते आ रहे हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन सौंपा गया, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब हालत यह हो गई है कि बारिश के मौसम में अंतिम संस्कार करना भी कठिन हो गया है।

“हम बार-बार कह चुके हैं कि श्मशान भूमि का रास्ता दुरुस्त किया जाए। लेकिन हर बार सुनवाई टाल दी गई। क्या प्रशासन को यही दिन दिखाने थे कि किसी की अर्थी कीचड़ में धँसती हुई निकले?” एक आक्रोशित ग्रामीण ने सवाल उठाया।


शासन की नाकामी का आईना

यह घटना न केवल गाँव की तस्वीर है बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का आईना है। ग्रामीण विकास और सड़क योजनाओं के दावे तो खूब होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बारिश की दो बूँदें गिरते ही रास्ते दलदल में बदल जाते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना मानवता के लिए कलंक है। “स्कूल और अस्पताल तक जाने वाले रास्तों की तरह ही श्मशान भूमि तक का रास्ता भी दुरुस्त होना चाहिए। यह सम्मान का सवाल है। मृत्यु के बाद भी सम्मान हर इंसान का अधिकार है,” एक कार्यकर्ता ने कहा।


तुरंत कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने माँग की है कि श्मशान भूमि तक जाने वाले रास्ते को तत्काल पक्का किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी आवाज़ अनसुनी की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

फिलहाल चेना देवी की अर्थी कीचड़ में धँसती तस्वीरें प्रशासनिक लापरवाही और बरसात से बिगड़ी सड़क व्यवस्था की गवाही दे रही हैं। यह घटना पूरे समाज को याद दिलाती है कि गाँव का गरीब इंसान जीते-जी संघर्ष करता है और मरने के बाद भी अपमान का शिकार होता है।



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