
बीकानेर स्थित भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र द्वारा एनईएच (उत्तर–पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र) योजना के अंतर्गत असम राज्य के कामरूप जिला में किसान–वैज्ञानिक संवाद एवं इनपुट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 20 जनवरी, 2026 को तहसील राजा पारा के अंतर्गत उमसुर, खोखापाड़ा, जुपांगबाड़ी, रंगामाटी, गरिलिक एवं मटैखार ग्रामों में संपन्न हुआ, जिसमें 300 से अधिक महिला एवं पुरुष किसान तथा पशुपालकों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. सागर अशोक खुलापे ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि पशुपालन को आर्थिक रूप से सशक्त आजीविका बनाने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग, उन्नत प्रबंधन तकनीकों तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए पशुधन प्रबंधन पर जोर दिया। साथ ही, पशुपालन गतिविधियों को नियमित आय एवं स्वरोजगार से जोड़ने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी भी साझा की।
केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. विश्वरंजन उपाध्याय ने संतुलित पोषण, खनिज मिश्रण तथा रोग-निवारण के महत्व को रेखांकित करते हुए पशु उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पोषण एवं समय पर स्वास्थ्य प्रबंधन से पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि एनईएच योजना के तहत उत्तर–पूर्वी क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं एवं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान आधारित तकनीकों को व्यवहार में उतारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के अनुभवों के बीच सेतु बनते हुए आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में ठोस आधार प्रदान कर रहे हैं।
इस अवसर पर भाकृअनुप–राष्ट्रीय सूअर अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भी पशुपालकों को उपयोगी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई। स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रगतिशील पशुपालकों ने एनआरसीसी द्वारा मिले वैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं इनपुट सहयोग के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में एनआरसीसी की टीम—सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी मनजीत सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अखिल ठुकराल, वित्त एवं लेखा अधिकारी आशीष पित्ती, सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजेश चौधरी तथा वरिष्ठ तकनीकी सहायक डॉ. विनोद कुमार यादव—ने पंजीकरण, इनपुट वितरण एवं अन्य व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही किसानों को एनईएच योजना से संबंधित प्रावधानों, लाभों एवं सुविधाओं की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई।






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