सुधा आचार्य ने सीमा पर लगाए चिड़िया महल…

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बीकानेर। भारत की संस्कृति “जियो और जीने दो” के सिद्धांत पर आधारित है प्राचीन काल से ही भारतीयों का पक्षियों के प्रति अत्यंत अनन्य स्नेह और लगाव रहा हैं और इसीलिए किसानों की मित्र चिड़िया भी भारतीय समाज में अत्यंत लोकप्रिय है परंतु वर्तमान में चिड़िया का अस्तित्व खतरे में है और इसीलिए सुधा आचार्य ने कोरोना काल में घरेलू चूड़ियों को बचाने का संकल्प लेते हुए इस दिशा में दुर्गा शंकर आचार्य मैमोरियल ट्रस्ट” के माध्यम से कार्य करना प्रारंभ किया और तभी से पति दुर्गा शंकर आचार्य की स्मृति में सुधा आचार्य सतत् चिड़िया महल लगाती रही है इसी कड़ी में कल भारत तिब्बत सहयोग मंच और दुर्गा शंकर आचार्य मेमोरियल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में नाजिया इलाही खान अधिवक्ता,उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के स्नेहिल सानिध्य में चिड़िया महल लगाने और अनेक वृक्ष लगाकर प्रकृति को संरक्षित करने का कार्य किया गया। इस अवसर पर नाचे इलाही खान ने बताया कि भारतीय संस्कृति में चिड़िया को लक्ष्मी के रूप में देखा जाता है। यह वैज्ञानिक तौर पर बायोइंडिकेटर एवं स्वस्थ पर्यावरण का प्रतीक है। गौरैया वहीं घोंसला लगाती है, जहां इकोसिस्टम सही हो।यह मात्र एक आम पक्षी नहीं है, बल्कि सदियों से, चिड़िया हमारे घरों और आसपास के वातावरण का एक अभिन्न अंग रही है, और इसे अक्सर “घर का पक्षी” कहा जाता है। भारत सहयोग मंच के बीकानेर के जिलाध्यक्ष दिलीप पुरी ने बताया कि पक्षियों के संरक्षण और प्राकृतिक वातावरण में उनकी रक्षा करने का महत्व भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित है ।
चिड़िया को प्रेम, शांति, और सुंदरता,शुभता, और साहस का प्रतीक माना जाता है। यह मानव बस्तियों के साथ जुड़ी हुई है और अक्सर घरों के आसपास देखा जाता है, जिससे यह बचपन की यादों और खुशी का प्रतीक बन गया है। भारत तिब्बत सहयोग मंच की प्रकृति संरक्षण प्रकोष्ठ,की राष्ट्रीय सहसंयोजक सुधा आचार्य ने बताया कि चिड़िया हमारे लोक जीवन और संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है
चिड़िया परागण और बीज फैलाव में मदद करती हैं, जो फसलों के लिए महत्वपूर्ण है। हानिकारक कीटों को खाकर, फसलों की रक्षा करती हैं। इसीलिए चिड़िया को “किसानों की मित्र* भी कहा जाता है
इसका सांस्कृतिक महत्व भी है चिड़िया को अक्सर कला, साहित्य, और लोककथाओं में चित्रित किया जाता है।
कुछ चिड़िया, जैसे कि गौरैया, को “घरेलू चिड़िया” माना जाता है उन्हें घर के आंगन में देखना शुभ माना जाता है।
चिड़िया को देखना, सुनना, या उनकी तस्वीरें देखना, लोगों को खुशी और शांति का अनुभव कराता है। चिड़िया लगाने के साथ-साथ सीमा सुरक्षा क्षेत्र में खेजड़ी ,नीम ,तुलसी और बेलपत्र के अनेक पौधे भी लगे गए इस कार्यक्रम का प्रारंभ सुधार आचार्य के द्वारा शंखनाद से किया गया इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नाजिया इलाही खान, सुबोध शर्मा सतीश चौबे, राष्ट्रीय संयोजक मां नर्मदा परिक्रमा बोर्ड मध्य प्रदेश, सीमा सुरक्षा बल के सेनापति (कमांडेंट) प्रभाकर सिंह डिप्टी कमांडेंट बीपी सिंह असिस्टेंट कमांडेंट विवेक शर्मा, नरेंद्र सिंह भाटी मोरखाणा, राजू पटेल, मुंबई, जाकिर हुसैन, नागपुर, प्रीतम सिंह चौहान,भोपाल, नेम सिंह चौहान, भोपाल सहित सेवा के अनेक जवानों सहित अनेक गणमान्य जन भी उपस्थित रहे

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