
बीकानेर। वाणिज्य, गृह विज्ञान सहित पाँच विषयों की पदोन्नति प्रक्रिया पिछले लंबे समय से ठप पड़ी है और अब तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। 03 अगस्त 2021 को किए गए संशोधन के बाद बने नए प्रावधानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया, जिसके चलते पात्र अभ्यर्थी भी अपात्र घोषित हो गए, जबकि विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।
संशोधन के विरोध में प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्यायालय की शरण ली, जहां से स्थगन आदेश मिलने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह अटक गई। इसके बाद विभाग द्वारा एक सूची जारी की गई, लेकिन न्यायालय में लंबित सभी मामलों को शामिल नहीं करने के कारण निदेशालय को सूची वापस लेनी पड़ी, जिससे विवाद और गहरा गया।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि न्यायालय में सरकारी पक्ष द्वारा बार-बार तिथियाँ लेने से निर्णय में अनावश्यक देरी हो रही है। वहीं, निदेशालय स्तर पर भी डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) आयोजित करने को लेकर कोई प्रभावी पहल नहीं की जा रही है।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों—आनंद पारीक, भावना देवड़ा और जय प्रकाश—ने बताया कि अभ्यर्थी न्यायालय के अधीन पदस्थापन के लिए शपथ पत्र देने को भी तैयार हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जोधपुर, जयपुर और बीकानेर सहित विभिन्न स्थानों से लगातार शिक्षा निदेशक और शिक्षा सचिव को ज्ञापन दिए गए, फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
इधर, अन्य विषयों की डीपीसी प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गई हैं, जबकि इन पाँच विषयों के अभ्यर्थी अब भी पदोन्नति से वंचित हैं। स्थिति यह है कि कई अभ्यर्थी सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
पदोन्नति प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी और विभागीय स्तर पर ठोस कार्रवाई के अभाव ने अभ्यर्थियों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। अब सभी की नजरें सरकार और न्यायालय के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान निकल सके।








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