दिल्ली/ बीकानेर। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को बिना किसी शर्त के तत्काल लागू कराने की मांग को लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला संगठनों का विरोध प्रदर्शन 20 जुलाई से जारी है। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बीकानेर (राजस्थान) से पहुंची महिला प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मोर्चा संभाला और केंद्र सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।
धरना स्थल पर ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमेन्स एसोसिएशन (AIDWA) के राष्ट्रीय नेतृत्व ने पूरी ताकत के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:
धरने को एडवां की राष्ट्रीय अध्यक्ष पी. के. श्रीमती, राष्ट्रीय महासचिव कोनिका घोष तथा अन्य केंद्रीय नेतृत्व शामिल रहा।
ऐडवा की संरक्षक वृंदा करात और सुभाषिनी अली सहगल ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को अब और अधिक टालना अन्यायपूर्ण है।
राजस्थान के सीकर से सांसद कॉमरेड अमराराम ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया। उन्होंने संसद के भीतर महिला आरक्षण के मुद्दे पर उठाए गए सवालों के बारे में प्रदर्शनकारियों को अवगत कराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को बिना किसी देरी के महिला आरक्षण को लागू करना ही होगा।
राजस्थान ऐडवा की महासचिव डॉक्टर सीमा जैन ने अपने संबोधन में कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ‘आगामी जनगणना’ और उसके बाद होने वाले ‘परिसीमन’ से जोड़कर अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। इसे जनगणना और परिसीमन की जटिलताओं से हटाकर तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण को लागू करवाने को लेकर अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति गांव से लेकर संसद तक संघर्ष कर रही है, और ये संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रहे संसद के मानसून सत्र में ही संवैधानिक संशोधन लाकर 33% महिला आरक्षण को वर्तमान सीटों की संख्या के आधार पर तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।
धरना स्थल पर बीकानेर के प्रतिनिधिमंडल ने जोरदार नारेबाजी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में वास्तविक संवैधानिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता, तब तक सडकों से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रहेगा।
धरने से पूरे देश की महिलाओं से संघर्ष में शामिल होने का आह्वान किया गया।
बीकानेर से जिला सचिव फरजाना आदि ने भी अपना संबोधन किया।
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