पोलैंड के बाद यूक्रेन क्यों जा रहे पीएम मोदी, क्या नाराज होगा रूस? जानें सबकुछ

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पोलैंड के बाद यूक्रेन क्यों जा रहे पीएम मोदी, क्या नाराज होगा रूस? जानें सबकुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के दौरे के एक महीने बाद यूक्रेन जा रहे हैं। वह 23 अगस्त को पोलैंड से ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचेंगे। पीएम मोदी की यूक्रेन यात्रा तब हो रही है, जब उसकी सेना रूसी जमीन में 100 किमी अंदर तक घुस चुकी है। ऐसे में पीएम मोदी के सामने दोनों देशों को मनाने की चुनौती होग

कीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राजधानी कीव पहुंचने वाले हैं। वह पोलैंड से 22 अगस्त को कीव के लिए रवाना होंगे। उनकी यह यात्रा रूस दौरे के ठीक एक महीने बाद हो रही है। पीएम मोदी पिछले महीने जब रूस पहुंचे तो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गले लगाकर उनका स्वागत किया। इसकी पश्चिमी मीडिया में खासी आलोचना हुई। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने भी इस मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अब वह पीएम मोदी की स्वागत की तैयारियां कर रहे हैं। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बावजूद भारत ने रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं।

पुतिन को शांति संदेश दे चुके हैं पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कई मौकों पर रूस और यूक्रेन में शांति का आह्वान किया है। हालांकि, उन्होंने युद्ध के लिए सीधे तौर पर रूस को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है। जुलाई में पीएम मोदी की मॉस्को यात्रा और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बैठक के दौरान ही रूसी सेना ने यूक्रेन में बच्चों के अस्पताल पर घातक हमला किया था। हालांकि, पीएम मोदी ने पुतिन के सामने ही उस हमले को लेकर सार्वजनिक तौर पर दुख जाहिर किया था। उस समय मोदी ने कहा, “जब मासूम बच्चों की हत्या की जाती है, तो दिल दुखता है और वह दर्द बहुत भयानक होता है।”

भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यूक्रेन यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्रीं होंगे, जो यूक्रेन का दौरा करेंगे। यूक्रेन की स्थापना के बाद लगभग 30 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूक्रेन का दौरा नहीं किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने सोमवार को एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान संवाददाताओं से कहा, “रूस और यूक्रेन दोनों के साथ भारत के ठोस और स्वतंत्र संबंध हैं और ये साझेदारी अपने आप में खड़ी हैं।”

क्या रूस-यूक्रेन में शांति वार्ता चाहता है भारत

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस यात्रा के जरिए संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। वह रूस-यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को लेकर भी अपना योगदान देना चाहता है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि भारतीय कूटनीति को एक कठिन संतुलन बनाए रखना होगा। डीडब्लू से बात करते हुए गेटवे हाउस थिंक टैंक के एक प्रतिष्ठित फेलो और पूर्व भारतीय राजदूत राजीव भाटिया ने कहा, “रूस एक दीर्घकालिक पारंपरिक सहयोगी है और यूक्रेन के भी भारत के साथ बहुत दोस्ताना संबंध रहे हैं। इसे बनाए रखना एक कठिन कार्य है, खासकर इसलिए क्योंकि यूक्रेन को पश्चिम से मजबूत समर्थन मिला है, जिसके साथ भारत के भी अच्छे संबंध हैं।” उन्होंने कहा, “भारत रूस के साथ अपने संबंधों का विस्तार करना और संतुलन बनाए रखना चाहता है। नई दिल्ली को इस बात की चिंता नहीं है कि कीव यात्रा मास्को के साथ भारत के संबंधों को खतरे में डाल सकती है।”

रूस के नाराज होने के कितने आसार

रूस और भारत के बीच सैन्य, व्यापार और कूटनीतिक संबंध पहले से ही गहरे हैं। भारत अपने तेल का 40% से अधिक और अपने हथियारों का 60% रूस से खरीदता है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में कोयला, उर्वरक, वनस्पति तेल और कीमती धातुओं का भी आयात करता है। यूक्रेन पर आक्रमण के कारण पश्चिमी देशों ने भारत को रूस से दूर करने की भरसक कोशिश की, लेकिन यह उनके लिए उल्टा साबित हुआ। इस दबाव ने भारत और रूस के संबंधों को और ज्यादा मजबूत किया। भारत इसलिए भी रूस को नहीं छोड़ना चाहता कि उसे डर है कि कहीं मॉस्को अलग-थलग होने पर चीन के बहुत ज्यादा करीब न चला जाए।

अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देश भारत-रूस संबंधों से चिढ़े हुए हैं। वह पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात पर भी तीखी प्रतिक्रिया दे चुके हैं। हालांकि, ये देश यह भी नहीं चाहते हैं कि रूस में भारत का प्रभाव खत्म हो, क्योंकि इससे क्रेमलिन में चीन का दबदबा बढ़ जाएगा। अभी तक पश्चिमी देशों के पास भारत का इस्तेमाल करने का एक अवसर बचा हुआ है, जो समय आने पर रूस पर दबाव डाल सकता है।

यूक्रेन दौरे में क्या करेंगे पीएम मोदी

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी के दौरे पर भारत खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करने और मानवीय सहायता में शामिल होने की कोशिश करेगा। यूक्रेन भी जानता है कि भारत ही एक ऐसा देश है, जिस पर वह मध्यस्थ के रूप में भरोसा कर सकता है। इसके अलावा दुनिया में कोई भी ऐसा देश नहीं है, जो रूस और यूक्रेन पर एक समान प्रभाव डाल सके। भारत के रूस से अच्छे संबंध जगजाहिर हैं। अमेरिका भी भारत पर भरोसा कर सकता है, जो यूक्रेन का सबसे बड़ा समर्थक है। ऐसे में पीएम मोदी चाहें तो यूक्रेन में शांति में बड़ा योगदान दे सकते हैं। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नई दिल्ली कीव में शांति योजना का अनावरण नहीं करेगी, लेकिन भारत शांति समझौते की बातचीत का समर्थन करने के लिए तैयार है।

एजेंडे में और क्या है?

रूस के यूक्रेन पर युद्ध के अलावा, कई अन्य मुद्दे हैं जिन पर मोदी संभवतः यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के साथ चर्चा करेंगे। दोनों नेता रक्षा और आर्थिक सहयोग के अलावा युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में भारत की भूमिका पर भी चर्चा कर सकेत हैं। पीएम मोदी युद्ध छिड़ने के बाद भारतीय छात्रों को निकालने में उनकी मदद के लिए यूक्रेनी सरकार के प्रति आभार व्यक्त कर सकते हैं।

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