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बीकानेर ! जॉइंट कमेटी करेगी रीको के कार्यों की जांच:एनजीटी ने कलेक्टर से 4 सप्ताह में मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट, उद्यमियों ने दी है आदेश को चुनौती

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जॉइंट कमेटी करेगी रीको के कार्यों की जांच:एनजीटी ने कलेक्टर से 4 सप्ताह में मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट, उद्यमियों ने दी है आदेश को चुनौती

बीकानेर

करणी औद्याेगिक क्षेत्र में जमा फैक्ट्रियाें का प्रदूषण युक्त पानी।

करणी औद्योगिक विस्तार को विकसित क्षेत्र घोषित करना रीको के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। एनजीटी ने इस मामले में जिला कलेक्टर को जॉइंट कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं तथा तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

रीको ने करणी विस्तार औद्योगिक क्षेत्र को विकसित क्षेत्र घोषित किया था। यह आदेश एक अप्रैल से प्रभावी हो गया। हालांकि इससे पहले ही व्यापारियों ने रीको के इस आदेश को चुनौती देते हुए एनजीटी में याचिका दायर कर दी। आरोप लगाया कि रीको ने वाटर और एयर पॉल्यूशन के नियमों को दरकिनार कर कंसेंट टू स्टेब्लिश एंड कंसेंट टू ऑपरेट बिना ही करणी विस्तार को विकसित क्षेत्र घोषित कर दिया। याचिका पर निर्णय देते हुए एनजीटी ने कलेक्टर को जॉइंट कमेटी बनाकर इसकी जांच कराने के आदेश दिए हैं तथा चार सप्ताह में तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।

कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने सोमवार को जॉइंट कमेटी का गठन किया है, जिसमें उपखंड अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के रीजनल ऑफिसर को सदस्य बनाया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए रीजनल ऑफिसर राजकुमार मीणा को नोडल अधिकारी बनाया है। यह कमेटी करणी विस्तार में उद्यमियों को दी गई सुविधाओं की जांच कर पता लगाएगी कि विकसित क्षेत्र किन नियमों के तहत घोषित किया गया है। रिपोर्ट में करणी विस्तार की समस्याओं को भी रखा जाएगा।

गौरतलब है कि करणी औद्योगिक क्षेत्र विस्तार में रीको ने 157 भूखंड बेचकर 150 करोड़ तो कमाए पर पर्यावरण सुरक्षा पर 22 करोड़ ही खर्च किए। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी की समस्या का समाधान करने के लिए सीईटीपी और पूरे क्षेत्र की सीवरेज समस्या का समाधान करने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट अब तक नहीं लग सका। केवल सड़क, बिजली, पानी की आपूर्ति की शर्तें पूरी करने के नाम पर इस क्षेत्र को पूर्व विकसित होने का दर्जा दे दिया गया। जिसे लेकर उद्यमियों में रोष है।

उनका कहना है कि करणी विस्तार पूरी हर विकसित नहीं हुआ है। अब तक मात्र 25 इकाइयां ही शुरू हुई हैं। उद्यमी नारायण दास तुलसानी का कहना है कि रीको लगातार पर्यावरण स्वीकृति की अवहेलना करता आ रहा है। उद्योगों को किसी तरह की सुविधाएं नहीं हैं।

उद्यमियों ने उठाए मुद्दे, जिनकी होगी जांच

  • प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने रीको को 17 जनवरी 12 को पर्यावरण स्वीकृति प्रदान की थी, जो 30 नवंबर 2014 तक ही वेलिड थी। उसके बाद किया किस नियम के तहत काम हुए।
  • कंसेंट टू ऑपरेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से क्यों नहीं लिया गया।
  • ट्यूब वैल खोदने के लिए भूजल बोर्ड की अनुमति क्यों नहीं ली गई।
  • पर्यावरण सुरक्षा पर कम खर्च

1.36 लाख वर्ग मीटर में फैला प्रदूषित पानी, नहीं लगा सीईटीपी

रीको के करणी औद्योगिक क्षेत्र की करीब 500 औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी करणी विस्तार में इकट्ठा होता है। पानी एक लाख 36 हजार वर्ग मीटर यानी 32 एकड़ में फैल चुका है। इस पानी का निस्तारण करने के लिए 26 करोड़ का सीईटीपी लगाने का प्रोजेक्ट मंजूर हुए था। लेकिन अब तक प्लांट नहीं लग पाया है। यह मामला रीको एमडी के पास पेंडिंग बताया जा रहा है।

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