पंखे से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक—कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने विद्यार्थियों को समझाया इंजीनियरिंग का असली कमाल
“सिलेबस तक सीमित न रहें विद्यार्थी, सवाल पूछें, प्रयोग करें और समाधान खोजें”
स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और सकारात्मक सोच से बनेगा श्रेष्ठ जीवन—आचार्य राजेंद्र जोशी ने दिया सफलता का मंत्र
बीकानेर। इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में बुधवार को बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में पधारे और विद्यार्थियों को विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने आविष्कार, नवाचार एवं रचनात्मकता को इंजीनियरिंग की मूल शक्ति बताते हुए विद्यार्थियों को नई सोच के साथ समस्याओं के समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया।
कुलगुरु ने सभागार में लगे एक सामान्य पंखे का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एक इंजीनियर रचनात्मक सोच और नवाचार का प्रयोग करे तो इसी साधारण पंखे में भी अनेक सुधार किए जा सकते हैं। इसकी हवा देने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है, बिजली की खपत कम की जा सकती है, इसे अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाया जा सकता है तथा आधुनिक तकनीक जोड़कर इसे स्मार्ट बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साधारण वस्तु में असाधारण संभावनाएं तलाशना ही इंजीनियर की वास्तविक पहचान है।
उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में इंजीनियरिंग के बढ़ते प्रभाव तथा आधुनिक बुनियादी ढांचा निर्माण में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका के अनेक उदाहरण देकर विद्यार्थियों को समझाया कि इंजीनियरिंग आज जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को नई दिशा प्रदान कर रही है।
मानव बुद्धिमत्ता से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक समझाया सीखने का विज्ञान
प्रो. गर्ग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानव बुद्धिमत्ता के बीच अंतर समझाते हुए बताया कि बुद्धिमत्ता का एक महत्वपूर्ण आधार सीखने की क्षमता है। उन्होंने गूगल मानचित्र का उदाहरण देते हुए समझाया कि किस प्रकार तकनीक उपलब्ध सूचनाओं और अनुभवों के आधार पर रास्तों और परिस्थितियों के अनुसार बेहतर सुझाव प्रदान करती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल पाठ्यक्रम की विषय-वस्तु तक सीमित न रहें। विषयों को समझकर पढ़ें, पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्र स्वयं हल करें, अपनी जिज्ञासा को जीवित रखें और लगातार नई चीजें सीखने की आदत विकसित करें।
“उठो, जागो और आगे बढ़ो”—आचार्य राजेंद्र जोशी ने दिया सम्पूर्ण कल्याण का संदेश
कार्यक्रम के दूसरे सत्र के प्रमुख वक्ता आचार्य राजेंद्र जोशी ने विद्यार्थियों को सम्पूर्ण स्वास्थ्य एवं कल्याण के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने स्वस्थ शरीर, संतुलित मन, सकारात्मक विचार एवं श्रेष्ठ जीवनशैली के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वास्तविक सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन से प्राप्त होती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संदेश “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” को विद्यार्थियों के जीवन का प्रेरक सूत्र बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जितेंद्र जैन एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अवधेश व्यास ने दीक्षारंभ कार्यक्रम की आगामी रूपरेखा की जानकारी देते हुए बताया कि अगले दो दिनों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रेरणात्मक व्याख्यान, तनाव प्रबंधन, जीवन प्रबंधन एवं विद्यार्थी हित से जुड़े विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के दोनों संघटक महाविद्यालयों—यूसीईटी एवं ईसीबी—के विद्यार्थियों को दो अलग-अलग औद्योगिक भ्रमण भी करवाए जाएंगे। इन औद्योगिक भ्रमणों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग जगत की कार्यप्रणाली, व्यावहारिक ज्ञान एवं वास्तविक कार्य वातावरण से परिचित कराना है।
खेल, पूर्व विद्यार्थी नेटवर्क और व्यक्तित्व विकास पर भी हुए विशेष सत्र
कार्यक्रम में डॉ. नवीन शर्मा ने खेल, उसकी उपयोगिता एवं प्रबंधन विषय पर विचार रखते हुए खेलों को स्वास्थ्य के साथ नेतृत्व, अनुशासन, टीम भावना और प्रबंधन कौशल विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया। वहीं डॉ. इंदु भूरिया ने महाविद्यालय के पूर्व विद्यार्थी संगठन एवं पूर्व विद्यार्थी नेटवर्क को मजबूत बनाने तथा विद्यार्थियों और संस्थान के बीच निरंतर संपर्क स्थापित करने के महत्व पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अवधेश व्यास ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन रेखा स्वामी ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. संजीव जैन, रजिस्ट्रार डॉ. अमित सोनी, डॉ. मनोज कुड़ी, कार्यक्रम संयोजक डॉ. जितेंद्र जैन, डॉ. अरुण पुरोहित, डॉ. गणेश प्रजापत, डॉ. ऋतुराज सोनी सहित संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।







