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बहन के लिए भाई लाया था MA की फर्जी डिग्री:लेक्चरर भर्ती में मेरिट में आने वाली युवती का खुलासा, आरोपी सरकारी टीचर गिरफ्तार

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बहन के लिए भाई लाया था MA की फर्जी डिग्री:लेक्चरर भर्ती में मेरिट में आने वाली युवती का खुलासा, आरोपी सरकारी टीचर गिरफ्तार

अजमेर

दोनों आरोपी युवतियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया। - Dainik Bhaskar

दोनों आरोपी युवतियों को गुरुवार को कोर्ट में पेश किया गया।

राजस्थान लोक सेवा आयोग की हिंदी लेक्चरर भर्ती – 2022 में फर्जीवाड़े को लेकर डेली नए खुलासे हो रहे हैं। इस एग्जाम में फर्जी डिग्री लगाकर मेरिट हासिल करने वाली दो युवतियों से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की पूछताछ जारी है।

इनमें से एक युवती ने बताया कि उसे एमए की डिग्री उसके भाई ने लाकर दी थी। आरोपी के भाई को सांचौर से गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार युवक दलपत सिंह भी सरकारी टीचर है। एसओजी ने अब मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार को लेकर भी जांच शुरू कर दी है।

इस यूनिवर्सिटी से फर्जी डिग्री ली गई थी। दअसल, बुधवार को एसओजी ने फर्जी डिग्री लगाकर एग्जाम देने वाली दो युवतियों कमला और ब्रह्माकुमारी को गिरफ्तार किया था। इस मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने एफआईआर दर्ज कराई थी।

डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन में हुआ खुलासा

RPSC के वरिष्ठ उप सचिव अजय सिंह चौहान ने भूतेल-साचौर निवासी ब्रह्माकुमारी पुत्री बाबूलाल और वाडा भावड़ी, साचौर निवासी कमला कुमारी पुत्री भारमल विश्नोई के खिलाफ रिपोर्ट दी गई थी। इसमें बताया गया कि RPSC ने 2022 में हिंदी स्कूल लेक्चरर एग्जाम आयोजित करवाया था। इसमें ऑनलाइन फॉर्म एप्लीकेशन में दोनों युवतियों ने ने फर्जी डिग्रियां लगाई थी। इसमें मेवाड़ यूनिवर्सिटी गंगरार चित्तौड़गढ़ की MA की डिग्रियां फर्जी थी।

15 अक्टूबर 2022 को हिंदी स्कूल लेक्चरर एग्जाम का आयोजन किया गया था। यह परीक्षा दो परियों में आयोजित हुई। पहली पारी सुबह 9 बजे से साढ़े 10 बजे तक सामान्य ज्ञान और दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक हिंदी विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी।

ब्रह्माकुमारी और कमला कुमारी ने यह परीक्षा पास कर ली। आरोपियों की एग्जाम में 7वीं और 36वीं रैंक थी। इसके बाद 14 जून 2023 को रिजल्ट घोषित किया गया था।

RPSC के सचिव रामनिवास मेहता व परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बुधवार शाम को इस पूरे मामले की जानकारी दी।

RPSC के सचिव रामनिवास मेहता व परीक्षा नियंत्रक आशुतोष गुप्ता ने बुधवार शाम को इस पूरे मामले की जानकारी दी।

अभ्यर्थी कमला कुमारी बिश्नोई ने ऑनलाइन आवेदन के समय एमए (हिन्दी) की वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय,कोटा की डिग्री दी थी, लेकिन नियुक्ति के समय मेवाड़ विश्वविद्यालय गंगरार, चित्तौड़गढ़ की फर्जी एमए की डिग्री लगाई थी। इसी तरह ब्रह्माकुमारी ने भी फर्जी डिग्री पेश की।

दोनों ही कैंडिडेट को 31 जुलाई से 14 अगस्त तक डॉक्युमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया था। लेकिन नहीं आई। बाद में बुधवार को जब आई तो यहां से इनको सिविल लाइन थाना पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला एसओजी को सौंप दिया। एसओजी ने दोनों केंडिडेट्स को गिरफ्तार कर लिया।

सांचौर से सबसे अधिक मामले

दोनों आरोपी युवतियों को फिलहाल एसओजी ने सात दिन की रिमांड पर ले रखा है। उनसे मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्धों की भी तलाश की जा रही है। जांच अधिकारियों के अनुसार पेपरलीक और फर्जी डिग्री मामलों में जिन 90 आरोपियों की तलाश की जा रही है उनमें 70 सांचौर जिले के हैं।

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