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विश्वविद्यालय में स्थाई राजस्थानी विभाग खोलने और पाठ्यक्रम में एनईपी के प्रावधान अनुसार अधिक से अधिक स्थानीय लेखकों को शामिल करने का होगा प्रयास: कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित

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एमजीएसयू के राजस्थानी विभाग और मुक्ति संस्था के संयुक्त तत्वावधान में कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी की दो पुस्तकों का हुआ विमोचन

बीकानेर, 3 अप्रैल। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के राजस्थानी विभाग और मुक्ति संस्था के तत्वावधान में कवि कथाकार राजेन्द्र जोशी द्वारा नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली के माध्यम से अनुदित दो पुस्तकों ‘ दरखत काई है’ और ‘ क्यूं’ का विमोचन गुरुवार को विश्वविद्यालय सभागार में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित थे। उन्होंने कहा कि साहित्य सृजन के क्षेत्र में राजस्थानी बेहद समृद्ध भाषा है। इस अन्य क्षेत्रों में बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार पाठ्यक्रमों में मातृ भाषा की आवश्यक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा विश्वविद्यालय में स्थाई राजस्थानी विभाग खोलने के प्रयास विश्वविद्यालय द्वारा किए जाएंगे। उन्होंने मातृ भाषा को किसी भी क्षेत्र की थाती बताया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को इस पर गर्व की अनुभूति और सम्मान का भाव होना चाहिए। उन्होंने बीकानेर की साहित्य परम्परा के बारे में बताया और युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक हरिशंकर आचार्य ने कहा कि किसी भी कृति का अनुवाद करना बेहद चुनौती पूर्ण कार्य होता है। इसमें मूल रचना के शिल्प सौंदर्य को बरकरार रखने के साथ इसे अनुदित भाषा में पठनीय बनाए रखने की जरूरत होती है।
राजेन्द्र जोशी ने नेशनल बुक ट्रस्ट और मूल पुस्तकों की विषय वस्तु के बारे में बताया और बताया कि बच्चों के लिए अनुवाद करना उन्हें सबसे ज्यादा सुकून देता है। उन्होंने पूर्व में एनबीटी (नेशनल बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली ) द्वारा प्रकाशित उनकी पुस्तकों के बारे में बताया।
इससे पहले अतिथियों ने दोनों पुस्तकों का विमोचन किया। विश्वविद्यालय की राजस्थानी भाषा की विभागध्यक्ष प्रो. संतोष शेखावत ने स्वागत उद्बोधन देते हुए राजस्थानी विभाग की विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया।
गीतकार राजाराम स्वर्णकार ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता डाॅ. गौरी शंकर प्रजापत ने किया।
चित्रकार योगेंद्र पुरोहित ने कुलपति और राजेन्द्र जोशी को उनके द्वारा बनाया गया पेंसिल स्केच भेंट किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के अतिरिक्त कुलसचिव डॉ. बिट्ठल बिस्सा, डॉ. अजय जोशी, जागती जोत के सम्पादक डॉ. नमामी शंकर आचार्य, डॉ. मनोज आचार्य , रामावतार उपाध्याय, दीपक चौधरी, विपिन विश्नोई, शुभकरण उपाध्याय, पपूसिंह भाटी, चतर नाथ सिद्ध, प्रियंका रघुवंशी, यशोवर्धनी पुरोहित, सपना कुमारी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

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