शिक्षा विभाग ने जारी किया डी एल एड द्वितीय वर्ष का रिजल्ट परंतु विद्यार्थी नहीं देख पा रहा रिजल्ट:: केवल रीट परीक्षा की एलिजिबिलिटी पाने के लिए जल्दबाजी में घोषित कर दिया गया परीक्षा परिणाम

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Report :: Sahil Pathan
बीकानेर। शिक्षा विभाग ने डी एल एड द्वितीय वर्ष का परीक्षा परिणाम आज धनतेरस पर घोषित किया है परंतु विद्यार्थी नहीं देख पा रहे रिजल्ट।केवल रीट परीक्षा की एलिजिबिलिटी पाने के लिए जल्दबाजी में घोषित कर दिया गया है यह परीक्षा परिणाम। डी एल एड द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम आज धनतेरस पर शिक्षा मंत्री ने ट्वीट कर जारी करने की घोषणा की। जबकि एक भी विद्यार्थी अपना परीक्षा परिणाम देखने में सफल नहीं हो पा रहा है। प्रत्येक विद्यार्थी जब अपनी लॉगिन आईडी के माध्यम से शाला दर्पण पर अपना परीक्षा परिणाम देखने के लिए क्लिक करता है तो उस पर एक सूचना दिखाई देती है कि आपके महाविद्यालय द्वारा स्काउट एवं गाइड कैंप की सूचना नहीं दी गई है।
जबकि उधर महाविद्यालयों का कहना है कि विभाग द्वारा शाला दर्पण के द्वारा विद्यार्थियों से संबंधित सभी सूचनाएं ऑनलाइन ही ली गई थी जिसमें स्काउट गाइड कैंप की 2020-21 की सूचना मांगी ही नहीं गई। जब ऑनलाइन सूचना मांगी ही नहीं गई तो महाविद्यालय सूचना किस प्रकार प्रेषित करते ? ऐसी स्थिति में सूचना प्रेषित करना संभव ही नहीं हुआ और उधर विभाग स्काउट गाइड कैंप की सूचना उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थी का परीक्षा परिणाम नहीं दिखा रहा। संपूर्ण राज्य के विद्यार्थियों के साथ इस तरह का खिलवाड़ करने वाली राज्य सरकार शायद परीक्षा परिणामों की अहमियत ही भूल गई है। दूसरी ओर अब तक डीएलएड विद्यार्थियों के इंटर्नशिप पूरी नहीं हुई है इंटर्नशिप पूरी नहीं होने के अभाव में महाविद्यालय द्वारा क्रियात्मक इंटर्नशिप के अंक भी प्रेषित नहीं किए जा सके हैं।जब महाविद्यालय द्वारा इंटर्नशिप के अंक ही प्रेषित नहीं किए गए हैं तो ऐसी स्थिति में परीक्षा परिणाम किस प्रकार घोषित हुआ ?यह अपने आप में सोच का विषय है ।
राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के ऊपर इसके साथ डी एल एड का परीक्षा परिणाम घोषित होने और उन्हें रीट में एलिजिबल बनाए जाने के इस कवायद के बीच महाविद्यालय के विद्यार्थी परेशान है क्योंकि अनेक विश्विद्यालयों के परीक्षा परिणाम अब तक जारी नहीं हुए हैं।कोटा यूनिवर्सिटी की तो परीक्षा ही आगामी 10 नवंबर से प्रस्तावित है ऐसी स्थिति में विद्यार्थी रीट की परीक्षा देने के बावजूद भी रीट के लिए एलिजिबल ना हो पाने के कारण मायूस हैं।
राज्य सरकार जब तक शिक्षा विभाग के इस तरह के तुगलकी निर्णयों पर लगाम नहीं लगाता तब तक विद्यार्थियों का भला करने का दंभ भरने वाली वाली यह कांग्रेस सरकार युवा पीढ़ी को नैराश्य से नही निकाल पाएगी।

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