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‘पुलिस, खान विभाग और बजरी माफिया की मिलीभगत’:हाईकोर्ट ने कहा- राजस्थान सरकार लगाम नहीं लगा सकती; अवैध खनन से जुड़ा केस CBI को सौंपा

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‘पुलिस, खान विभाग और बजरी माफिया की मिलीभगत’:हाईकोर्ट ने कहा- राजस्थान सरकार लगाम नहीं लगा सकती; अवैध खनन से जुड़ा केस CBI को सौंपा

जयपुर

राजस्थान में अवैध बजरी खनन और माफिया से जुड़े सभी मामलों की जांच के लिए हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने बजरी के अवैध खनन और परिवहन से जुड़े एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए।

हाईकोर्ट ने कहा- प्रदेश में बजरी माफिया, पुलिस और खान विभाग की मिलीभगत से अवैध खनन हो रहा है। ऐसे में इन मामलों पर सरकार लगाम नहीं लगा सकती। इसलिए इस मामले को सीबीआई को ट्रांसफर किया जाता है। सीबीआई को यह छूट दी जाती है कि वह चंबल और बनास नदी के आसपास के क्षेत्र में बजरी माफिया पर दर्ज मामलों की भी जांच कर सकती है।

कोर्ट ने सीबीआई डायरेक्टर को निर्देश दिए कि वे इन मामलों की जांच करके 4 सप्ताह में कोर्ट में प्राथमिक रिपोर्ट पेश करें।

एसीएस से मांगी थी एक्शन टेकन रिपोर्ट
दरअसल, हाईकोर्ट ने आरोपी जब्बार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए 29 फरवरी 2024 को एसीएस (होम) से मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी। 9 अप्रैल को हुई सुनवाई में सरकारी अधिवक्ता शेर सिंह महला ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने एसीएस (होम), बूंदी एसपी, मामले के जांच अधिकारी को कोर्ट के आदेश से अवगत करवाया था। लेकिन, बूंदी एसपी की ओर से तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर खानापूर्ति की गई है। कोर्ट ने इस मामले में 9 अप्रैल को सुनवाई पूरी कर आदेश सुरक्षित रख लिया था, जो आज सुनाया गया।

कोर्ट ने कहा- सिर्फ कागजी अभियान चलाते हैं
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा- पुलिस और खान विभाग बजरी माफिया के खिलाफ कागजी अभियान चलाते हैं। जब कार्रवाई की बात आती है तो कुछ नहीं किया जाता। इससे लगता है अधिकारियों को परवाह नहीं है। पुलिस और खान विभाग की बजरी माफिया से मिलीभगत जाहिर होती है। इस मामले में भी कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया गया है।

मुख्य सचिव कार्यालय से सहयोग नहीं मिला
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- इस मामले में भी पुलिस की जांच लचर प्रवृत्ति की रही। कोर्ट के आदेश के बाद भी न जांच अधिकारी पेश हुआ और न संबंधित रिकॉर्ड पेश किया गया। बूंदी पुलिस ने भी बजरी माफिया पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं रखा।

अधीनस्थ न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए मुख्य सचिव कार्यालय को दिशा निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मुख्य सचिव कार्यालय से किसी तरह का सहयोग नहीं मिला। कोर्ट ने कहा- बजरी माफिया केवल राज्य का राजस्व नुकसान नहीं कर रहे बल्कि अवैध बजरी खनन से पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

कोर्ट ने आरोपी जब्बार के जमानत प्रार्थना पत्र पर अंतरिम आदेश देते हुए सुनवाई 16 मई तक टाल दी है। कोर्ट ने आदेश की कॉपी सीबीआई निदेशक, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और खान निदेशक को भी भिजवाई है।

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