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मौलाना को मारने के लिए नाबालिगों की ‘दृश्यम’ जैसी प्लानिंग:सभी 6 बच्चों ने एक ही कहानी दोहराई, 300 सीसीटीवी से भी नहीं मिला था सुराग ‘Drishyam’ like planning of minors to kill Maulana: All 6 children repeated the same story, no clue was found even from 300 CCTVs

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'Drishyam' like planning of minors to kill Maulana: All 6 children repeated the same story, no clue was found even from 300 CCTVs

मौलाना को मारने के लिए नाबालिगों की ‘दृश्यम’ जैसी प्लानिंग:सभी 6 बच्चों ने एक ही कहानी दोहराई, 300 सीसीटीवी से भी नहीं मिला था सुराग

अजमेर

‘2 अक्टूबर को हम स्वामी चिन्मयानंद के सत्संग के लिए पणजी गए थे। वहां रेस्टोरेंट में सबने पावभाजी खाई थी।’ ये संवाद दृश्यम फिल्म का है। फिल्म में खुद को बचाने के लिए नायक (अजय देवगन) और उसका परिवार एक झूठी कहानी बनाता है। जितनी बार पुलिस पूछती है- 2 अक्टूबर को कहां थे? सब यही जवाब देते हैं।

अजमेर में मौलाना मोहम्मद माहिर (30) की हरकतों से परेशान होकर रस्सी से गला घोंटकर उसका मर्डर करने वाले 6 नाबालिगों ने भी पुलिस से बचने के लिए एक झूठी कहानी बनाई और हर नाबालिग ने पुलिस पूछताछ में वही कहानी दोहराई- ‘8 बजे मौलाना बाहर गए थे, 10 बजे वापस लौटे, 2 बजे 3 नकाबपोश मस्जिद में आए और मौलाना को मार कर पीछे की दीवार कूद कर भाग गए।’

नाबालिगों ने ऐसी प्लानिंग रची कि पुलिस भी दंग हो गई। 15 दिन तक पुलिस को गुमराह करते रहे। आखिरकार मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ के बाद आखिर एक बच्चा पूछताछ में टूट गया उसने पुलिस के सामने सारी कहानी कह डाली।

26 अप्रैल की रात मौलाना मोहम्मद माहिर की लाश मस्जिद में बने इस कमरे में मिली थी। बच्चे भी मौलाना के साथ ही सोते थे।

26 अप्रैल की रात मौलाना मोहम्मद माहिर की लाश मस्जिद में बने इस कमरे में मिली थी। बच्चे भी मौलाना के साथ ही सोते थे।

पुलिस के सामने 15 दिन तक 5 बड़े सवाल थे-

बच्चों के कपड़ों पर खून कैसे आया?

कथित आरोपियों ने 8 फीट की दीवार कैसे कूदी?

CCTV में कोई संदिग्ध क्यों नजर नहीं आया?

हत्या हुई तो आरोपी डंडा वहीं छोड़ कर क्यों भागे?

5वां और सबसे बड़ा सवाल- बच्चे अपने बयानों को हूबहू रिपीट क्यों कर रहे थे?

6 के 6 बच्चे पूछताछ में हूबहू एक ही कहानी एक लाइन बार-बार दोहरा रहे थे।

पुलिस ने मौके पर FSL टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया था।

पुलिस ने मौके पर FSL टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया था।

पहले पढ़िए बच्चों ने कैसे किया पुलिस को गुमराह

अजमेर के रामगंज स्थित दौराई कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मदीना मस्जिद में 26 अप्रैल की देर रात मौलाना की हत्या हुई थी। इसके बाद बच्चों ने पास ही में रहने वाले सरफराज को बुला कर इसकी जानकारी दी थी। सरफराज ने ही सबसे पहले पहुंचकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद आजादपुर निवासी तौसीफ असरफ की रिपोर्ट पर मामला दर्ज किया था। तौसीफ इससे पहले के मस्जिद के मुख्य मौलाना का बेटा है। 7 साल से मोहम्मद माहिर यहां मुख्य मौलाना के रूप में बच्चों को पढ़ाता था।

पुलिस ने बच्चों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया- रात करीब 2 बजे तीन नकाबपोश बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने उनको धमकाते हुए कहा था- चिल्लाए तो तुम्हें भी जान से मार देंगे। इसके बाद कमरे से बाहर निकाल दिया।

अजमेर के रामगंज स्थित दौराई कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मदीना मस्जिद में 26 अप्रैल की देर रात मौलाना की हत्या हुई थी।

अजमेर के रामगंज स्थित दौराई कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मदीना मस्जिद में 26 अप्रैल की देर रात मौलाना की हत्या हुई थी।

पहले दिन शक के दायरे में थे नाबालिग

रामगंज थाना प्रभारी रविंद्र खींची ने बताया- 26 अप्रैल के बाद 8 मई तक पुलिस ने अलग-अलग पहलुओं पर जांच की। सबसे पहले बच्चों के कपड़ों पर लगा खून उन्हें शक के दायरे में ला रहा था। ऐसे में जब बच्चों से पूछा तो उन्होंने कहा- जब हमलवार मौलाना की हत्या करके भागे तो हम उन्हें देखने गए थे। ऐसे में हमारे भी कपड़ों पर खून लग गया।

बच्चों के बताए अनुसार जब हम दीवार तक पहुंचे तो ये 8 फीट की थी। इससे कूदकर उस ओर जाना पॉसिबल नहीं था। लेकिन, मान लिया जाए कि कोई इस दीवार से कूदा भी है तो पीछे बाड़े में उसके फुटप्रिंट भी होते, जो मौके से नहीं मिले। पुलिस का शक अब भी बच्चों पर था लेकिन बच्चों की बनाई कहानी की भी जांच जरूरी थी।

ये है अजमेर के मदीना मस्जिद का 10 किमी का इलाका, जहां पुलिस ने 300 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले थे।

ये है अजमेर के मदीना मस्जिद का 10 किमी का इलाका, जहां पुलिस ने 300 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले थे।

सघन इलाके में 300 फुटेज खंगाले, 50 संदिग्धों से पूछताछ की

खींची ने बताया- इसके बाद पुलिस ने आसपास के घरों और दुकानों के 10 किलोमीटर के एरिया में 300 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले। इसमें 50 से ज्यादा सस्पेक्ट हमारी नजर में थे। देर रात का समय था। ऐसे में ज्यादातर लोग घरों में ही होते हैं। इक्के-दुक्के सड़कों, गलियों से गुजरते नजर आए। कोई बाइक पर कोई पैदल तो कोई कार में था। एक-एक से पूछताछ की गई। पर कुछ हाथ नहीं आया। उस दौरान कोई मस्जिद के आसपास या बाड़े की दीवार के पास नहीं आया था।

मस्जिद के अंदर बने कमरे में मौलाना की हत्या के बाद डॉग स्क्वॉयड की टीम ने भी जांच की थी।

मस्जिद के अंदर बने कमरे में मौलाना की हत्या के बाद डॉग स्क्वॉयड की टीम ने भी जांच की थी।

11 दिन बाद बच्चों को फिर से बुलाया

खींची ने बताया- इसी जांच में 11 दिन गुजर गए थे। मस्जिद और इलाके से जुड़े लोगों ने रेंज आईजी लता मनोज कुमार से भी बातचीत कर हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की थी। इसी दौरान हमने बच्चों को अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट कर दिया था। 8 मई को इस मामले को लेकर अजमेर एसपी देवेंद्र बिश्नोई ने पुलिस टीम की मीटिंग बुलाई थी। 11 दिनों से जांच का ब्योरा मांगा और कहा- एक बार बच्चों को बुलाओ और उनसे फिर से पूछताछ करो।

बच्चों ने इसी दीवार से 3 नकाबपोश आरोपियों के भागने का बयान दिया था।

बच्चों ने इसी दीवार से 3 नकाबपोश आरोपियों के भागने का बयान दिया था।

इसके बाद शुरू हुई बच्चों की ‘दृश्यम’

मीटिंग के बाद सभी 6 बच्चों को वापस बुलाया गया। बच्चों से पूछताछ की तो सभी एक स्वर में रटे-रटाए वाक्य दोहराते। कहते- ‘शाम 8 बजे मौलाना बाहर खाना खाने गए। 10 बजे वापस लौटे थे। इसके बाद सो गए। 2 बजे काले कपड़ों में अचानक 3 नकाबपोश आए और मौलाना के सिर पर डंडों से वार कर उनकी हत्या कर दी।’

पहले सभी 6 बच्चों से एक साथ पूछताछ की। सभी ने एक ही कहानी बताई। फिर अलग-अलग पूछताछ की तब भी एक ही कहानी आई। इसके बाद पुलिस का शक गहरा गया। काउंसलिंग करते हुए मौलाना के साथ यूपी से आए नाबालिग से पूछताछ की तो आखिर वो टूट गया और उसने पूरी कहानी कह दी।

पुलिस के अनुसार, दीवार कूदकर कोई भागा होता तो यहां उसके पैरों के निशान जरूर होते।

पुलिस के अनुसार, दीवार कूदकर कोई भागा होता तो यहां उसके पैरों के निशान जरूर होते।

ढाई साल से मौलाना कर रहा था शोषण

पूछताछ में उसने बताया- मौलाना उसे वारदात से 1 दिन पहले 25 अप्रैल को ही अपने साथ लाया था। उसने रात को बच्चे के साथ कुकर्म करने का दबाव बनाया था। इसके बाद बच्चे ने धमकी दी कि अगर उसने ऐसा किया तो वह चिल्ला कर सबको जगा देगा। इसके बाद मौलाना ने किसी को ना बताने के लिए उसे रुपयों का लालच दिया था। इसके बाद बच्चों की जब आपस में बातचीत हुई तो उसने अन्य 5 बच्चों को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। इसके बाद बाकी के 5 बच्चों ने भी अपनी आपबीती बता दी। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई साल से मौलाना उनका शारीरिक शोषण कर रहा है। इसके बाद सभी ने एक राय होकर मौलाना की हत्या का प्लान बनाया।

लोगों से बोले- मौलाना के कुर्ते पर हमारे फिंगर प्रिंट्स हो सकते हैं

मौलाना की हत्या करने के बाद सभी बच्चे डरे हुए थे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने जब उनसे पूछा कि घबराओ मत तुम लोगों को कुछ नहीं होगा तो बच्चों ने कहा- नकाबपोश जब मौलाना को मार कर भागे तो हमने उन्हें संभालने का प्रयास किया था। ऐसे में हमारे फिंगर प्रिंट्स मौलाना के कपड़ों पर हो सकते हैं। हमें इस बात का डर लग रहा है। हत्या के बाद सभी बच्चे मौके पर घूमते रहे। रेकी करते रहे कि पुलिस की तहकीकात कहीं उन तक तो नहीं पहुंच रही। वे बार-बार अपडेट लेते रहे कि कहीं पुलिस को उनकी कहानी के बारे में सच तो नहीं मालूम चल गया। जब पुलिस ने उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें शिफ्ट किया तो सभी नाबालिग आश्वस्त थे कि पुलिस अब उन तक नहीं पहुंच जाएगी।

सबसे पहले पुलिस को हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा मस्जिद के पीछे ही मिल गया था।

सबसे पहले पुलिस को हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा मस्जिद के पीछे ही मिल गया था।

पहले चूहे मारने की दवा खरीदी थी

बच्चों ने पुलिस को पूछताछ में बताया- पहले हमने मेडिकल से चूहे मारने की दवा खरीदी थी। लेकिन, आपस में चर्चा की तो लगा कि कहीं अगर इससे मौलाना पर फर्क नहीं पड़ा तो मुश्किल हो जाएगी। इसके बाद ये लोग नींद की दवा लेकर आए। खुद ही बच्चों ने रायता बनाया और जब मौलाना लौटा तो उसे पीने के लिए कहा। मौलाना ने एक बार तो मना कर दिया। लेकिन, बच्चों ने आग्रह किया कि हमने खास आपके लिए बनाया है। तब मौलाना ने बूंदी का रायता पी लिया। कुछ ही देर बाद मौलाना का जी मिचलाने लगा तो उसने अपने किसी साथी से बाहर से कोल्ड ड्रिंक मंगवाकर पी थी। इसके बाद वो सो गया। उसके सोने के बाद बच्चों ने डंडे से सिर पर वार किया। जैसे ही मौलाना उठने की कोशिश करने लगा तो बच्चों ने रस्सी उसके गले में डालकर उसे तक नहीं छोड़ा जब तक मौलाना की जान नहीं निकल गई।

मौलाना माहिर इसी मदरसे में पढ़ कर गया था। 7 साल पहले ही यहां बच्चों को पढ़ाने आया था।

मौलाना माहिर इसी मदरसे में पढ़ कर गया था। 7 साल पहले ही यहां बच्चों को पढ़ाने आया था।

मौलाना माहिर करीब 7 साल पहले रामपुर (UP) से यहां आया था। 28 अक्टूबर 2023 को मस्जिद के मुख्य जाकिर हुसैन की तबीयत बिगड़ने के कारण मौत हो गई थी। इसके बाद मस्जिद के मुख्य मौलाना की जिम्मेदारी मोहम्मद माहिर को दी गई थी। मौलाना का परिवार रामपुर में ही रहता है। मस्जिद में मौलाना के साथ 15 बच्चे रहते थे। ईद के चलते 10 बच्चे अपने घर चले गए थे। ऐसे में यहां 5 बच्चे रह रहे थे। मौलाना 25 अप्रैल को ही अपने साथ रामपुर से एक नाबालिग को लेकर आया था।

मोबाइल में मिले अश्लील वीडियो

पुलिस ने बच्चों की निशानदेही पर मौलाना का मोबाइल और हत्या के इस्तेमाल की गई रस्सी को पीछे बाड़े से ही जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को मौलाना के मोबाइल से कई सारे अश्लील वीडियो बरामद हुए हैं। इसके साथ गूगल और यूट्यूब पर भी अश्लील वीडियो देखने की सर्च हिस्ट्री बरामद हुई है।

काउंसिलिंग में जांचेंगे बच्चों की मानसिक स्थिति

पॉक्सो कोर्ट के एडवोकेट रूपेंद्र परिहार बताते हैं- संभवत यह राजस्थान का पहला मामला है। इसमें 6 नाबालिग बच्चों के साथ जिस तरह से गलत हरकतें की गईं वह भी एक संगीन अपराध ही था। बच्चों को इस बैड टच के बारे में अपने माता-पिता को बताना था। माता-पिता को भी बच्चों को गुड टच बैड टच के बारे में जानकारी देनी चाहिए। अब इस मामले में पहले बच्चों की काउंसिलिंग CWC (बाल कल्याण समिति) करेगी। वे इनकी मानसिक और बौद्धिक स्तर को कद काठी के हिसाब से जांचेंगे। इसके बाद इन बच्चों पर चलने वाले मुकदमे पर तय होगा कि इसे बालिग या नाबालिग कोर्ट में चलाया जाए।

मौलाना की हत्या को लेकर समाज के लोगों ने आईजी से मुलाकात कर मामले का खुलासा करने की मांग की थी।

मौलाना की हत्या को लेकर समाज के लोगों ने आईजी से मुलाकात कर मामले का खुलासा करने की मांग की थी।

ये था पूरा मामला

रामगंज स्थित दौराई कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मदीना मस्जिद में मौलाना मोहम्मद माहिर की 26 अप्रैल की देर रात 2 बजे हत्या कर दी गई थी। प्रत्यक्षदर्शी बच्चों ने बताया था कि रात करीब 2 बजे तीन नकाबपोश बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने उनको धमकाते हुए कहा था- चिल्लाए तो तुम्हें भी जान से मार देंगे। इसके बाद कमरे से बाहर निकाल दिया।

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