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आतंकी हमले ने खत्म किया जयपुर का परिवार:तीन बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का हाथ; मोबाइल स्टेटस पर मुस्कुराती तस्वीरें, एक कॉल ने रुलाया

आतंकी हमले ने खत्म किया जयपुर का परिवार:तीन बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का हाथ; मोबाइल स्टेटस पर मुस्कुराती तस्वीरें, एक कॉल ने रुलाया

जयपुर

6 जून को जयपुर के चौमूं और पांच्यावाली ढाणी का परिवार वैष्णो देवी के लिए रवाना हुआ। मोबाइल पर लगातार स्टेटस अपडेट कर रहे थे।

मुस्कुराती तस्वीरें देख परिवार के लोग भी खुश थे, लेकिन फिर रविवार रात एक कॉल आया, जिसने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं।

रविवार को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए जयपुर के चौमूं-हरमाड़ा के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में 2 साल का मासूम भी शामिल है।

मामला सामने आने के बाद टीम चौमूं की पांच्यावाली ढाणी पहुंची।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

बच्चों को घटना का पता न चले, इसलिए गांव के लोग घर से दूर एक पेड़ के नीचे जमा थे।

दोपहर का वक्त, चौमूं की पांच्यावाली ढाणी।

तेज गर्मी के बीच एक पेड़ के नीचे गांव के कुछ लोग बैठे थे। आंखों में जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के खिलाफ गुस्सा और अपनों को खोने का गम था।

टीम ढाणी में पहुंची तो गांव के बड़े हिदायत दे रहे थे- ‘सब घरों में टीवी बंद करा दो। ध्यान रखना! बच्चों के हाथ में मोबाइल न हो।’

इस हिदायत की वजह भी थी- गांव के कुछ लोगों को ही जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले में गांव के चार लोगों की मौत की सूचना थी।

इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी था इस दर्द को परिवार के बच्चों तक न पहुंचने देना, कम से कम तब तक तो नहीं, जब तक शव नहीं आ जाते।

पूजा, ममता, राजेंद्र और लिवांश की मौत हो गई है। पवन घायल हो गए।

एक कॉल ने छीन ली खुशियां

रविवार शाम तक पांच्यावाली ढाणी में सब कुछ आम दिनों की तरह चल रहा था। रात को करीब सवा नौ बजे ओमप्रकाश के पास एक रिश्तेदार के आए कॉल ने गांव के पूरे माहौल को ही बदल दिया।

फोन करने वाले ने ओमप्रकाश को बताया गया कि वैष्णो देवी से कटरा लौटते समय श्रद्धालुओं से भरी बस पर आतंकियों ने हमला किया है। हमले में उनकी बेटी पूजा, दोहिता लिवांश, छोटे भाई राजेंद्र सैनी और उसकी पत्नी ममता की मौत हो गई है।

दामाद पवन सैनी गंभीर रूप से घायल है और उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने इसकी जानकारी भाई मंगलचंद सैनी और अन्य ग्रामीणों को दी।

जिसके बाद गांव में मातम छा गया। परिजनों ने दिल पर पत्थर रखकर किसी तरह बच्चों को खाना खिलाकर सुलाया।

ओमप्रकाश ने बताया कि हादसे में बेटी और दोहिते की मौत हो गई। छोटा भाई और उसकी पत्नी भी नहीं रहे।

परिवार और बच्चों को नहीं लगने दी सूचना

ओमप्रकाश रात भर अपने रिश्तेदारों और परिजनों से दामाद पवन के स्वास्थ्य की जानकारी लेने में जुटे रहे। वहीं ग्रामीणों ने सोमवार सुबह समझदारी से काम लेते हुए बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया।

परिजनों को केवल दुर्घटना होने और उनके माता-पिता के अस्पताल में इलाज चलने की ही जानकारी दी गई। पूरे दिन राजेंद्र सैनी के तीनों बच्चे किसी अनहाेनी की आशंका से आशंकित घर में ही रहे।

वहीं प्रशासनिक अधिकारी घर से कुछ दूरी पर पेड़ के नीचे बैठे हुए थे। मीडियाकर्मियों और अन्य लोगाें को भी मृतकों के घर नहीं जाने दिया गया।

तीर्थ यात्रियों की इसी बस पर आतंकी हमला हुआ था। पहले फायरिंग की गई। इसके बाद बस खाई में गिर गई।

टीवी बंद, परिजनों ने बच्चाें से लिए मोबाइल

परिजनों ने बच्चों से मोबाइल ले लिए और टीवी देखना भी बंद करा दिया, ताकि उन्हें आतंकी घटना के बारे में पता न चले।

जितेंद्र सैनी ने बताया कि राजेंद्र सैनी उनके ताऊजी के बेटे हैं। इनके परिवार में एक बेटी और दो बेटे हैं। 20 वर्षीय बेटी वर्षा सैनी बीएड कर रही है। 17 साल का बड़ा बेटा राहुल फर्स्ट ईयर और छोटा बेटा लक्की 12वीं क्लास में है।

स्टेटस से मिल रही थीं खुशियां

मृतक राजेंद्र के भाई जितेंद्र ने बताया कि जम्मू -कश्मीर जाने के बाद से राजेंद्र सैनी के वॉट्सऐप स्टेटस से उन्हें जानकारी मिल रही थी।

राजेंद्र जहां भी घूमने जाते थे, अपने परिवार की फोटो स्टेटस पर जरूर लगाते थे। इससे हमें उनके बारे में जानकारी मिल रही थी।

शिवखोड़ी जाने से पहले भी उन्होंने स्टेटस पर जम्मू-कश्मीर के कई जगहों की फोटो लगाई थी।

जहां भी घूमने जा रहे थे, फोटो स्टेटस पर अपलोड कर रहे थे। किसी को नहीं पता था कि ये तस्वीरें ही आखिरी याद बनकर रह जाएंगी।

शिवखोड़ी जाने का प्लान ही नहीं था

मृतका पूजा के भाई ललित ने बताया कि उसके चाचा-चाची राजेंद्र प्रसाद सैनी और ममता सैनी, बहन-जीजा हरमाड़ा निवासी पूजा और पवन और भांजा टीटू सैनी 6 जून को वैष्णो देवी दर्शन करने गए थे।

पहले वो और उनका परिवार भी साथ जाने वाला था। उन्होंने 10 जून को साथ रवाना होने के लिए कहा था। लेकिन ममता और उनके परिवार का कहना था कि पहले भी कई बार वैष्णो देवी जाने का कार्यक्रम टल चुका है। ऐसे में वो 6 जून को ही रवाना हो गए।

ललित ने ये भी बताया कि पहले उनका शिव खोड़ी जाने का प्लान ही नहीं था। वैष्णो देवी से लौटने के बाद उनका प्लान बना और वहां से लौटते हुए ये हमला हो गया। पूजा और पवन की शादी चार साल पहले ही हुई थी।

आतंकियों के खिलाफ गुस्सा, बच्चों को सरकारी नौकरी की मांग

जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की घटना के बारे में जानकारी मिलते ही जनप्रतिनिधि और ग्रामीण पांच्यावाली ढाणी पहुंचना शुरू हो गए। पूरा गांव एकजुट नजर आया।

ग्रामीणों को एक ही चिंता थी कि जब मंगलवार को मृतकों के शव गांव में पहुंचेंगे, तब मासूम बच्चों पर क्या गुजरेगी। ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों से भी बार-बार मृतकों के बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर गुहार कर रहे थे।

गांव के ही राजकुमार सैनी ने बताया कि राजेंद्र के तीनों बच्चे नाबालिग हैं। पिता लोन लेकर किसी तरह रेडीमेड कपड़े की दुकान कर परिवार का गुजारा कर रहे थे।

अब बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी? उन्होंने इन बच्चों को सरकारी नौकरी देने की मांग की।

ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे एसडीएम दिलीप सिंह राठौड़ से भी परिजनों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता दिलाने की मांग दोहराई।

हमले में मारे गए लोगों के शव घटनास्थल पर बिखरे पड़े थे। स्थानीय लोगों ने घायलों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

लोन लेकर की थी दुकान, परिवार में कोई कमाने वाला नहीं बचा

मृतक राजेंद्र के बड़े भाई ओम प्रकाश सैनी ने बताया कि राजेंद्र ने कुछ समय पहले ही लोन लेकर चौमूं में ही कपड़े की दुकान शुरू की थी।

यही परिवार की रोजी रोटी का एकमात्र जरिया है। अब राजेंद्र के गुजर जाने के बाद परिवार में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। तीनों बच्चों वर्षा, राहुल और लक्की के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।

फिलहाल तीनों बच्चों की जिम्मेदारी ताऊ ओमप्रकाश शर्मा पर आ गई है। परिजनों की मांग है कि तीनों बच्चों को सरकारी नौकरी और मुआवजा दिया जाए।

आखिरी मुलाकात याद कर नम हुई आंखें
मृतक ममता सैनी की देवरानी पूजा सैनी को यकीन नहीं हो रहा है कि उनके जेठ राजेंद्र और जेठानी इस दुनिया में नहीं रहे। जम्मू-कश्मीर जाने से पहले दोनों पूजा से मिलने आए थे।

इस दौरान उन्होंने पूजा को वैष्णो देवी जाने के बारे में बताया था। पूजा बताती हैं कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि ये उनकी आखिरी मुलाकात बनकर रह जाएगी।

पूजा बताती हैं कि भतीजी को अपनी बेटी ही मानती थी। उसकी शादी में उन्हाेंने ही कन्या दान किया था। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि अब उनकी बेटी वापस नहीं लौटेगी।

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