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पोप फ्रांसिस ने 12 महिला कैदियों के पैर धोए-चूमे:व्हीलचेयर पर बैठकर ईस्टर से पहले की रस्मअदायगी; सांस की बीमारी से परेशान थे, अब स्वस्थ

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पोप फ्रांसिस ने 12 महिला कैदियों के पैर धोए-चूमे:व्हीलचेयर पर बैठकर ईस्टर से पहले की रस्मअदायगी; सांस की बीमारी से परेशान थे, अब स्वस्थ

पोप फ्रांसिस ने रोम की रेबिबिया जेल में महिला कैदियों के पैर धोए और चूमे। - Dainik Bhaskar

पोप फ्रांसिस ने रोम की रेबिबिया जेल में महिला कैदियों के पैर धोए और चूमे।

कैथोलिक ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस ने ईस्टर से पहले रोम की जेल में बंद 12 महिला कैदियों के पैर धोए और चूमे। पोप ने व्हीलचेयर पर बैठे-बैठे इस रस्म को पूरा किया।

दरअसल, 31 मार्च को ईस्टर है। इससे पवित्र बृहस्पतिवार (Holy Thursday) के दिन लोगों के पैर धोकर और उन्हें चूमकर पोप फ्रांसिस या इस पद पर बैठा कैथलिक धर्मगुरु ये जताते हैं कि वो अपने समुदाय के लोगों की सेवा करने के लिए समर्पित हैं।

पोप ने भी इस परंपरा को निभाया। रस्म रेबिबिया जेल में निभाई गई। महिलाएं एक ऊंचे मंच पर स्टूल पर बैठी थीं, ताकि पोप व्हीलचेयर से आसानी से रस्म को पूरा कर सकें। जब फ्रांसिस ने महिलाओं के पैर धोए तो वे रो पड़ीं। पोप ने उनके पैर पर धीरे से पानी डाला और फिर एक छोटे तौलिये से पोछा फिर चूमकर रस्म को पूरा किया।

पोप फ्रांसिस ने 'पवित्र बृहस्पतिवार' की प्रार्थना के बाद महिला कैदियों के पैर धोए।

पोप फ्रांसिस ने ‘पवित्र बृहस्पतिवार’ की प्रार्थना के बाद महिला कैदियों के पैर धोए।

जिजस के समय से यह परंपरा चली आ रही
जिजस को सूली (क्रॉस) पर चढ़ाए जाने से पहले आखिरी बार जब उन्होंने अपने ईसाई समर्थकों के साथ खाना खाया तो जिजस ने उनके पैर धोए थे। पोप इसी परंपरा को निभाया निभा रहे हैं। 2013 में जब पोप जब कैथलिक धर्मगुरू बने वो तब से इस रिवाज को निभाते आ रहे हैं। उन्होंने इसमें दूसरे समुदाय और धर्म के लोगों और महिलाओं को शामिल किया।

पोप ने कहा- पाखंड से दूर रहें सभी पादरी
पोप फ्रांसिस ने रेबिबिया जेल में लोगों को संबोधित भी किया। उन्होंने अपने संबोधन में पादरियों से पाखंड से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने पादरियों से कहा कि वे आम लोगों को जो भी उपदेश देते हैं, उसका पालन उन्हें खुद भी अपने आध्यात्मिक जीवन में करना चाहिए।

पोप ने महिला कैदियों के पैर पर पानी डाला, उसे तौलिये से सुखाया फिर पैरों को चूमकर रस्म को पूरा किया।

पोप ने महिला कैदियों के पैर पर पानी डाला, उसे तौलिये से सुखाया फिर पैरों को चूमकर रस्म को पूरा किया।

सांस से जुड़ी बीमारी से परेशान थे
87 साल के पोप को सांस संबंधी बीमारी है। उन्हें अक्सर सांस लेने में दिक्कत होती है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से वो इस बीमारी के कारण किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे थे। न ही लोगों को संबोधित कर रहे थे। हालांकि महिलाओं के पैर धोने वाली रस्म के दौरान वो स्वस्थ दिखाई दिए।

अप्रैल 2023 में पोप फ्रांसिस ब्रोंकाइटिस (सांस संबंधी बीमारी) का इलाज कराने के लिए तीन दिन अस्पताल में भर्ती हुए थे। इससे पहले उन्हें 2021 में कोलन सर्जरी के लिए जेमेली अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पोप फ्रांसिस कार में रोम की रेबिबिया जेल पहुंचे थे। वो काफी खुश नजर आए।

पोप फ्रांसिस कार में रोम की रेबिबिया जेल पहुंचे थे। वो काफी खुश नजर आए।

ईसा मसीह के दोबारा जीवित होने की खुशी में मनाते हैं ईस्टर
ईस्टर ईसाई धर्म के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने की खुशी में ईस्टर पर्व मनाया जाता है। ईसाई धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को क्रॉस पर चढ़ाया गया था। इसके तीसरे दिन (ईस्टर के दिन) ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, जिसे ईसाई धर्म के लोग ईस्टर संडे के नाम से मनाते हैं।

माना जाता है कि पुनर्जन्म के बाद ईसा मसीह करीब 40 दिन तक अपने शिष्यों के साथ रहे थे। इसके बाद वे हमेशा के लिए स्वर्ग चले गए थे।

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