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वीर सावरकर जयंती पर विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन

पीबीएम नेत्र चिकित्सालय हेतु 2100 काले चश्मे किए गए भेंट
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बीकानेर। महान राष्ट्रभक्त, स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी वीर सावरकर की 141वीं जयंती पर वीर सावरकर पर्यावरण सेवा समिति द्वारा पुरानी गिन्नाणी स्थित महिला मंडल विद्यालय सभागार में विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया ।

समिति के वरिष्ठ सदस्य पूर्व पार्षद उम्मेद सिंह राजपुरोहित ने बताया कि कार्यक्रम में वीर सावरकर के पुण्य स्मरण के साथ ही समिति द्वारा वर्ष पर्यन्त किए जाने वाले सेवा कार्य के तहत पीबीएम चिकित्सालय के नेत्र चिकित्सकों को मोतियाबिंद ऑपरेशन के मरीजों हेतु 2100 काले चश्में सप्रेम भेंट किए गए और साथ ही भारतीय सिविल सेवा परीक्षा 2023 में 61वीं रैंक हासिल करने वाली बीकानेर की होनहार बिटिया खुशहाली सोलंकी का सम्मान भी किया गया। उन्होंने बताया कि समिति की प्रेरणा से भामाशाह अशोक प्रजापत, विनय सिन्हा और धनजी सुथार के सहयोग से 2100 काले चश्मों का का वितरण किया गया ।

राजपुरोहित ने बताया कि वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य की अध्यक्षता में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिवबाड़ी महंत स्वामी विमर्शानंद गिरि जी महाराज, विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी, विधायक ताराचंद सारस्वत, राती घाटी संस्थान के नरेंद्र सिंह बीका एवं वक्ता के रूप में मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली एवं साहित्यकार अन्नाराम उपस्थित रहे ।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों और गणमान्य जनों ने वीर सावरकर के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर उनका भावभीना स्मरण किया ।

पूर्व पार्षद उम्मेद सिंह राजपुरोहित ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए समिति द्वारा किए जा रहे सामाजिक सरोकार और सेवा कार्यों के बारे में जानकारी दी । उन्होंने इस अवसर पर बीकानेर राज्य के महाराजा करण सिंह और राजमाता सुशीला कुमारी का स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लगातार किए जा रहे पौधारोपण और अन्य कार्यों की जानकारी दी ।

मुख्य अतिथि शिवबाड़ी महंत स्वामी विमर्शानंद गिरि जी महाराज ने वीर सावरकर के व्यक्तित्व और कृतित्व के पुण्य स्मरण के साथ ही स्वामी विवेकानंद और आचार्य शंकर के व्यक्तित्व की चर्चा की । उन्होंने शास्त्र और शस्त्र के सामंजस्य की बात करते हुए सभी से योगेश्वर कृष्ण जैसे व्यक्तित्व को आत्मसात करने और युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने की अपील की।

उन्होंने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष करते हुए वीर सावरकर के तेजमय जीवन से सीखने और संकल्प सिद्धि हेतु दृढ़ निश्चय करने की बात कही और निरंतर विमर्श, संवाद और कर्म करते रहने का आह्वान किया।

बीकानेर पूर्व क्षेत्र की विधायक सुश्री सिद्धि कुमारी ने वीर सावरकर को पुष्पांजलि देते हुए महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया और साथ ही बीकानेर की होनहार बेटी खुशहाली सोलंकी को उसकी सफलता पर बधाई दी।

श्रीडूंगरगढ़ विधायक ताराचंद सारस्वत ने वीर सावरकर के अमिट बलिदान को याद करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में चंद्रशेखर और भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों के योगदान का स्मरण किया । उन्होंने कहा कि सावरकर के व्यक्तित्व के बारे में जानबूझकर फैलाई गई अनर्गल बातें दुर्भाग्यपूर्ण है और आने वाली पीढ़ियों को उनके जीवन से शिक्षा लेनी चाहिए ।

मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. चक्रवर्ती नारायण श्रीमाली ने अपने उद्बोधन में वीर सावरकर को एक व्यक्ति नहीं बल्कि महान व्यक्तित्व और वक्त का सांचा बदलने वाला तथा सदैव आगे बढ़ाने की अनुभूति देने प्रेरणा पुंज बताया । उन्होंने सावरकर को कवि और क्रांतिकारी के रूप में याद किया और भारतीय संस्कारों का संवाहक प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनके मूल्यों को अपनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है । कथित इतिहासकारों पर कटाक्ष करते हुए श्रीमाली ने कहा कि सावरकर की जीवनी के बारे में भारतीयों को गलत ढंग से भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। उन्होंने सावरकर को अंग्रेजों द्वारा दो आजीवन कारावास के दौरान दी गई कठिन यातनाओं, उनके जीवन संस्मरणों और उनकी पुस्तक प्रकाशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर श्रीमाली ने बीकानेर राज्य के महाराजा करण सिंह के योगदान और व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला ।

वक्ता साहित्यकार अन्नाराम ने कहा कि वीर सावरकर को अन्य महापुरुषों की तरह ही सम्मान और न्याय मिलना चाहिए । उनके ऊपर उछाले जाने वाले राजनीतिक कीचड़ की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि बुद्धिजीवियों का दायित्व है कि सही तथ्यों को जनता के समक्ष प्रस्तुत करें । आजीवन कारावास के समय सावरकर को दी गयी घोर प्रताड़ना का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि देश में पहली बार विदेशी वस्तुओं की होली जलाकर सावरकर ने ही स्वदेशी अभियान को बढ़ावा दिया ।

राती घाटी संस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह बीका ने इतिहास के सही ढंग से संकलन की बात रखी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य ने समिति को साधुवाद देते हुए इस प्रकार के प्रेरणास्पद और जानकारीपरक कार्यक्रमों को आगे भी निरंतर आयोजित करते रहने का आह्वान किया।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा भामाशाह अशोक प्रजापत के परिजनों, विनय सिन्हा, धनजी सुथार और महिला मंडल विद्यालय के संचालक गजेन्द्र सिंह राठौड़ का स्वागत किया गया।

सेवानिवृत्त शिक्षा अधिकारी सुरजाराम राजपुरोहित ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार प्रकट किया।

कार्यक्रम का संचालन शिक्षाविद मदन मोदी ने किया ।

इस अवसर पर दुष्यंत चौहान, राजकुमार सिंह, मोहित राजपुरोहित, शंकरलाल मेहरा, दिग्विजय सिंह, मदन मोदी, स्वरूप सिंह मनाणा, नरेंद्र राजपुरोहित, सुरेंद्र सिंह मादा, श्याम सिंह हाडला, मनीष आचार्य, अजय खत्री, विजय सिंह पड़िहार,रामकुमार व्यास, सुनील कश्यप, युवराज व्यास, नेमीचंद तंवर, अयूब कायमखानी, भारती अरोड़ा, संतोष प्रजापत, अदिति आचार्य, सुमन जैन, दृष्टि आचार्य, जितेंद्र राजपुरोहित, गजेंद्र सिंह राठौड़, प्रेम सिंह मेड़तिया, रामपाल सेन, इकरामुदीन कोहरी, चेतन पवार, शिव मेघवाल राजकुमार, ओमप्रकाश भाटी, मूल सिंह, राजेश कश्यप इत्यादि उपस्थित रहे ।

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