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ट्रेजरी से 5.23 करोड़ के स्टाम्प-टिकट चुराए, प्रिंटिंग मशीन लगाई:फर्जी छापकर कितने बेचे, हिसाब नहीं; कैशियर, वेंडर समेत 3 गिरफ्तार

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ट्रेजरी से 5.23 करोड़ के स्टाम्प-टिकट चुराए, प्रिंटिंग मशीन लगाई:फर्जी छापकर कितने बेचे, हिसाब नहीं; कैशियर, वेंडर समेत 3 गिरफ्तार

बांसवाड़ा

बांसवाड़ा के 5 करोड़ से ज्यादा के स्टाम्प-टिकट घोटाले में पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जिला कोष कार्यालय (ट्रेजरी) से कुल 5 करोड़ 23 लाख 88 हजार 511 रुपए के स्टाम्प चुराए गए थे। जब जिला कोष अधिकारी हितेश गौड़ ने भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया तो सामने आया कि 6 साल से ट्रेजरी का स्ट्रॉन्ग रूम इंचार्ज (कैशियर) नारायणलाल यादव (55) ही स्टाम्प-टिकट चुराकर बेच रहा था। इसके बाद 29 अप्रैल को कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया गया। उसी दिन पुलिस ने नारायणलाल को डिटेन कर लिया। पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए। बांसवाड़ा पुलिस ने स्टाम्प-टिकट घोटाले में कुल 3 लोगों को 2 मई को गिरफ्तार कर लिया।

⁠एसपी हर्षवर्धन अगरवाला ने बताया- बांसवाड़ा ट्रेजरी में बांसवाड़ा शहर निवासी नारायणलाल यादव ने 2018 से स्ट्रॉन्ग रूम इंचार्ज के पद पर जॉइन किया। नारायणलाल ने वहां से स्टाम्प व टिकट चुराना शुरू कर दिया। स्टाम्प टिकट बेचने के लिए उसने बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी निवासी आशीष जैन (45) नाम के वेंडर से साठगांठ की। आशीष कलेक्ट्रेट परिसर में टेबल लगाकर स्टाम्प-टिकट बेचता था। दोनों जमकर घोटाला करने लगे। नारायण ट्रेजरी से स्टाम्प टिकट चुराता और वेंडर आशीष उन्हें बेचता। दोनों का मुनाफा बराबर। दोनों इस अवैध कमाई से जमीनें खरीदने लगे।

आरोपी नारायणलाल यादव ने ट्रेजरी में स्ट्रॉन्ग रूम इंचार्ज जॉइन करने के बाद से ही घोटाला करना शुरू कर दिया था।

ट्रेजरी से चुराकर 5 करोड़ से ज्यादा के स्टाम्प टिकट बेच डाले

वर्ष 2020 और 2021 में कोरोना काल में स्टाम्प बिक्री रुक गई। 2022 तक भी कोरोना की असर रहने के कारण स्टाम्प -टिकट की बिक्री कम रही। इसके बाद मार्केट में जैसे-जैसे डिमांड बढ़ती गई नारायणलाल ने स्ट्रॉन्ग रूम से स्टांप-टिकट चुराकर बेचना फिर से शुरू कर दिया। इस तरह नारायण ने 5 करोड़ 23 लाख रुपए के स्टाम्प व टिकट गायब कर दिए।

इस गैंग में तीसरा साथी भरत कुमार राव भी शामिल हो गया। भरत कुमार वेंडर आशीष जैन का सहयोगी है। वह भी बांसवाड़ा के खांदू कॉलोनी का रहने वाला है। पुलिस ने नारायणलाल को पकड़ा तो एक के बाद एक आशीष और भरत भी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। एसपी ने कहा- स्टाम्प के रुपए की रिकवरी के लिए भी आरोपियों की प्रॉपर्टी भी अटैच की जा सकती है।

वेंडर आशीष जैन (बाएं) और उसका सहयोगी भरत कुमार राव।

लालच इतना बढ़ा कि स्टाम्प प्रिंटिंग की मशीनें खरीद लीं

⁠एसपी हर्षवर्धन अगरवाला ने बताया- नारायणलाल और आशीष का पैसों का लालच इतना बढ़ गया कि 6 महीने पहले दोनों ने मिलकर खुद की प्रिंटिंग प्रेस लगाने की साजिश रची। इन्होंने नकली स्टाम्प और टिकट छापने के लिए 2 प्रिंटर खरीदे। पिछले छह महीने से ये लोग खुद फर्जी रंगीन स्टाम्प और टिकट छापकर सीधे ग्राहकों को बेच रहे थे। इस तरह ऑरिजनल स्टाम्प चोरी और फर्जी स्टाम्प प्रिंटिंग से अवैध कमाई दोगुना होने लगी।

प्रिंट अच्छा नहीं था, इसलिए सीधे ग्राहकों को बेचे ताकि पकड़े न जाएं

डीएसपी सूर्यवीरसिंह ने बताया- वेंडर आशीष को पुलिस ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में उसकी टेबल पर मौका तस्दीक कराई। आरोपी वेंडर आशीष जैन और कैशियर भरत के घर की तलाशी ली गई। आशीष के घर से प्रिंटर और करीब 500 नकली टिकट बरामद हुए। नारायणलाल, आशीष और भरत तीनों ने मिलकर स्ट्रॉन्ग रूम से करीब 10 लाख टिकट और स्टाम्प का हेरफेर कर बेच डाले।

आरोपी इतने शातिर थे कि वे जानते थे कि जानकार व्यक्ति नकली स्टाम्प को एक बार देखकर ही पकड़ लेगा। इसलिए उन्होंने दुकानों पर नकली स्टाम्प टिकट न बेचकर सीधे ग्राहकों को बेचे। आरोपियों से अब तक सिर्फ 2.28 लाख रुपए ही बरामद हो सके हैं। मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं।

जिला कोष कार्यालय (ट्रेजरी) के स्ट्रॉन्ग रूम से 2018 से स्टाम्प चुराए जा रहे थे। इन्हें वेंडर आशीष से साठगांठ कर बेचा जा रहा था।

ऐसे सामने आया था घोटाला

स्टाम्प घोटाला तब सामने आया जब जिला कोष अधिकारी हितेश गौड़ ने फरवरी 2024 में जॉइन करने के बाद स्ट्रॉन्ग रूम का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) किया। इसमें स्टाम्प और टिकट के स्टॉक और मौके पर उपलब्धता में अंतर आया। इसके बाद कमेटी गठित कर जांच करने पर सामने आया कि कुल 5 करोड़ 23 लाख 88 हजार 511 रुपए के स्टाम्प कम पाए गए। इसके बाद कोतवाली थाने में 29 अप्रैल रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने 20 अप्रैल को ही डिटेन किया और पूछताछ की। इसके बाद अपराध कबूल करने पर 2 मई को गिरफ्तार कर लिया।

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