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पाकिस्तानी सरकारी वकील ने PoK नागरिक को विदेशी बताया:अगवा पत्रकार का केस लड़ रही एडवोकेट बोलीं- वो कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते

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पाकिस्तानी सरकारी वकील ने PoK नागरिक को विदेशी बताया:अगवा पत्रकार का केस लड़ रही एडवोकेट बोलीं- वो कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं मानते

इस्लामाबाद

पत्रकार अहमद फरहद शाह का केस लड़ रही वकील इमान मजारी हाजिर ने दावा किया कि एडवोकेट जनरल ने PoK को बाहरी जमीन कहा।

पाकिस्तान के इस्लामाबाद हाईकोर्ट में सरकारी वकील ने PoK को लेकर एक बयान दिया है। जिसके बाद वहां उनकी आलोचना हो रही है। उन्होंने कोर्ट में सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से अगवा किए गए कवि और पत्रकार अहमद फरहद शाह को विदेशी नागरिक बताया।

फरहद शाह का केस लड़ रही वकील इमान मजारी हाजिर ने ये दावा किया है। उन्होंने कोर्ट के बाहर मीडिया उन्होंने कहा कि सरकारी वकील ये दलील दे रहे थे कि कश्मीर विदेशी जमीन है। ये अच्छा इम्प्रैशन नहीं है। रियासत कश्मीर को बाहरी बता रही है। इससे अच्छा संदेश नहीं जा रहा है।

पाकिस्तान ने कश्मीर के जिस हिस्से पर कब्जा किया है, वह उसे आजाद कश्मीर कहता है। वहीं, भारत उसे PoK यानि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहता है। भारत का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) जम्मू कश्मीर का हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान ने जबरदस्ती कब्जा कर रखा है।

तस्वीर PoK के 38 साल के पत्रकार अहमद फरहद शाह की है, जो 14 मई को अपने घर से लापता हो गए थे। (फाइल)

क्या है अहमद फरहद शाह का पूरा मामला
PoK के अहमद फरहद शाह लगभग 16 दिन से लापता थे। जब उनके परिजन इस्लामाबाद हाईकोर्ट पहुंचे तो वहां पर उन्हें जानकारी दी गई कि वे धीरकोट पुलिस की कस्टडी में हैं। इस मामले में शुक्रवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अहमद फरहद शाह की गुमशुदगी पर कोर्ट में पिटिशन दाखिल करने वाली ईमान माजरी ने कहा, अहमद कश्मीर में ही हैं ये पुलिस की ओर से कोर्ट में बताया गया है।

इससे पहले अहमद के परिवार वालों ने दावा किया था कि सरकार की आलोचना करने की वजह से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने उसे गायब करवा दिया है। अहमद की पत्नी उरूज जैनब ने बताया था कि 14 मई को देर रात 4 लोग गहरे रंग के कपड़ों में उनके घर पहुंचे थे। उन्होंने अहमद को खींचकर घर से बाहर निकाला और फिर उसे जबरदस्ती एक कार में बैठाकर ले गए। उनके साथ 3 और गाड़ियां मौजूद थीं। हालांकि, पाकिस्तान की सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए बताया था कि अहमद ISI की कस्टडी में नहीं हैं।

कवि और पत्रकार अहमद के परिवार ने बुधवार को उनसे मुजफ्फराबाद के पुलिस स्टेशन में मुलाकात की।

अहमद ने PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की कवरेज की थी
अहमद फरहद पाकिस्तान के फ्रीलांस पत्रकार और एक कवि हैं। 38 साल के अहमद PoK के बाग शहर से आते हैं। उसने पिछले कुछ समय में PoK में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की कवरेज की थी। वे पाकिस्तानी फौज की आलोचना के लिए जाने जाते हैं।

अहमद की पत्नी जैनब ने अलजजीरा को बताया कि उनके पति पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी PTI के समर्थक हैं। इस वजह से उन पर काफी समय से सरकारी एजेंसियां दबाव बनाती आई हैं।

जैनब ने आगे बताया कि अहमद सिर्फ मानवाधिकारों के पक्ष में हैं। जब नवाज शरीफ की पार्टी PML-N को फौज ने दबाव डालकर सत्ता से बेधकल किया था, तब अहमद ने PML-N के समर्थन में भी प्रदर्शन किए थे।

पत्रकार ने कहा था- मेरी जान को फौज से खतरा
जैनब ने बताया कि उनके पति कई बार अपनी जान को खतरा बता चुके थे। उन्होंने कहा था कि PoK के मुद्दे उठाने और देश की राजनीति पर टिप्पणी करने की वजह से फौज उनके पीछे लगी हुई है।

अहमद की पत्नी ने 15 मई की सुबह इस्लामाबाद के हाईकोर्ट में अपने पति को ढूंढने और अदालत के सामने पेश किए जाने की याचिका लगाई थी। जैनब ने मांग की थी कि उनके पति के अचानक लापता होने के मामले की जांच की जाए।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, जैनब ने बताया था कि लापता होने के दो दिन बाद वॉट्सऐप के जरिए अहमद ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। ऑनलाइन कॉल पर अहमद ने उनसे अपनी याचिका वापस लेने को कहा था। जैनब ने बताया कि हर कॉल 30 सेकेंड की होती थी। अहमद के बात करने के लहजे से पता चल रहा था कि उनसे यह सब जबरदस्ती बुलवाया जा रहा था।

अहमद ने कहा था कि अगर जैनब अपनी याचिका वापस ले लेंगी तो वह 2 दिन के अंदर घर आ जाएंगे। अहमद ने जैनब से यह भी कहा था कि वह किसी निजी काम की वजह से बाहर हैं और बिलकुल सुरक्षित हैं। अहमद की बात मानकर जैनब ने याचिका वापस लेने की अर्जी भी लगा दी थी। हालांकि, इसके बाद भी अहमद घर नहीं लौटे।

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